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रेलवे के नए आदेश से लोको पायलटों पर बढ़ा बोझ, इंजन संभाले या पीछे जाकर बत्ती लगाए

Published: Wed, 04 Nov 2026 01:20 PM (IST)

रेलवे बोर्ड ने बिना गार्ड वाली मालगाड़ियों में टेल लैंप लगाने की जिम्मेदारी अब लोको पायलटों को सौंप दी है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. लोको पायलटों को बिना गार्ड मालगाड़ियों में टेल लैंप लगाना होगा।

  2. रेलवे बोर्ड के इस निर्णय से रनिंग स्टाफ में नाराजगी है।

  3. इसे संरक्षा से खिलवाड़ और अतिरिक्त जिम्मेदारी बताया जा रहा है।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। मालगाड़ी लेकर चलने वाले लोको पायलट अब इंजन संभालने के साथ ट्रेन के पीछे जाकर टेल लैंप भी लगाएंगे। ट्रेन के अंतिम डिब्बे की पहचान कराने वाले इस संकेतक को लगाने और उसकी स्थिति की निगरानी का जिम्मा भी अब चालक पर होगा। रेलवे बोर्ड के इस निर्णय से रनिंग स्टाफ में नाराजगी है। उनका सवाल है कि ट्रेन चलाने पर ध्यान दें या पीछे जाकर लैंप लगाने और उसकी निगरानी में समय लगाएं?

रेलवे बोर्ड की डिप्टी डायरेक्टर श्वेता शर्मा ने 29 सितंबर, 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके अनुसार बिना ट्रेन मैनेजर (गार्ड) वाली मालगाड़ियों में टेल लैंप लगाने की जिम्मेदारी लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की होगी। ट्रेन रवाना करने से पहले उन्हें पीछे जाकर लैंप लगाना होगा। इसके बाद उसमें किसी तरह की गड़बड़ी या बदलाव पर भी नजर रखनी होगी। महिला लोको पायलटों को भी इस जिम्मेदारी से छूट नहीं दी गई है।

आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) के सहायक महामंत्री बसंत लाल चतुर्वेदी ने इसे संरक्षा और सुरक्षा से खिलवाड़ बताते हुए निर्णय पर सवाल उठाया है। दरअसल, मालगाड़ियों से ट्रेन मैनेजर (गार्ड) की व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त की जा रही है। अब इस व्यवस्था के भीतर पनप रहे विरोध को यूनियन ने आवाज दी है। रेलकर्मियों का कहना है कि चालक पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालना सुरक्षित संचालन की दृष्टि से उचित नहीं है।

मालगाड़ियों में 48 से 58 डिब्बे होते हैं और उनकी लंबाई 600 से 750 मीटर तक होती है। यात्री ट्रेनों में भी गार्ड की व्यवस्था समाप्त करने पर विचार चल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ट्रेनों के संचालन की जिम्मेदारी केवल लोको पायलटों के भरोसे रहने की आशंका है। इससे रनिंग स्टाफ की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ रेल संरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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पूर्वोत्तर रेलवे में गार्डों का टोटा
पूर्वोत्तर रेलवे में गार्डों (ट्रेन मैनेजर) का टोटा है। इसके चलते मालगाड़ियां बिना गार्ड के ही चल रही हैं। जबकि, गार्ड ही ट्रेनों में टेल लैंप लगाते हैं। रिकार्ड पर नजर दौड़ाएं तो सितंबर, 2025 तक वाराणसी मंडल में 96 और लखनऊ मंडल में गार्डों के 72 पद खाली चल रहे थे। जिसमें सर्वाधिक गुड्स गार्ड के पद शामिल थे। गार्डों की कमी पर आल इंडिया गार्ड काउंसिल के जोनल सेक्रेटरी नसीमुर्रहमान नाराजगी जताते हैं। कहते हैं, लगातार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद भी रेलवे प्रशासन गार्डों की भर्ती नहीं कर रहा है। वे रेलवे प्रशासन से गार्डों के खाली पद को भरने की मांग करते हैं।

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