सिद्धार्थनगर, नीलोत्पल दुबे। Coronavirus Lockdown : कोरोना वायरस से निपटने के लिए लोग तरह से तरह से अपनी सेवा देने में जुटे हैं लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के एक मंदिर से अपना पूरा दानपात्र प्रशासन को सौंपने की पहल कर सेवा की मिसाल पेश की है। खास बात यह कि इस मंदिर का दान पात्र पिछले छह दशक से नहीं खुला है। अब अधिकारियों की मौजूदगी में यह खुलेगा। दान पात्र से निकले रुपयों को कोरोना से बचाव के लिए खर्च किया जाएगा।

काली मंदिर ने पेश की मिसाल

डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित इस काली मंदिर ने सेवा की मिसाल पेश की है। कपिया के लोगों ने महाकाली मंदिर के दान पात्र में जमा धनराशि को कोरोना बचाव में प्रयुक्त देने के लिए प्रशाशन को पत्र लिखा है। यह अपने आप में अलग इस लिए है क्योंकि अभी तक किसी मंदिर से इस प्रकार सहयोग देने की सिफारिश नहीं की गई, जबकि देश के मंदिरों में अकूत धनराशि चढ़ावे की मौजूद है। कपिया महाकाली स्थान कितना पुराना है यह कोई नहीं जानता।

यह है मंदिर का इतिहास

बुजुर्ग सुनी सुनाई बात बताते हैं कि एक बार महराजगंज जनपद के लेहड़ा देवी से क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी पाटेश्वरी मिलकर लौट रही थीं। यहां कई एकड़ में फैले आम व नीम की छांव में उन्होंने कुछ देर विश्राम किया। उस वक्त यहां कामाख्या पीठ के सिद्ध डेरा डाले हुए थे। उन्होंने माता का स्वरूप पहचानकर यहीं रहने की स्तुति की। माता यहां  काली स्वरूप में रहने को तैयार हुई। 70 वर्ष पहले यहां भव्य मंदिर बना और दूर दराज के लोग दर्शन करने व मन्नतें मांगने पहुंचने लगे। गांव निवासी अवधेश कुमार दुबे ने बताया कि दान की रकम छह दशक से नहीं गिनी गई। लाकर की चाभी भी गांव के संभ्रांत व्यक्ति के पास है। प्रशासन जब चाहे मंदिर में जमा राशि का उपयोग कोरोना बचाव में कर सकता है। कृष्णमुरारी दूबे, कुलदीप दुबे, बृजेश जी,  मन्नू, लाले, रोशन गौतम, सुराती, मुबारक, दुलारे, जियाऊ, सलीम, मिट्ठु बाबा आदि के नाम पत्र में शामिल हैं।

वीडियो कॉल से कर रहे माता का दर्शन

लॉकडाउन के के चलते लोग मंदिरों में नहीं जा पा रहे हैं और अधिष्ठात्री के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तो इसकी सहूलियय भी प्रारंभ हो गई है। मंदिर के पुजारी का नंबर है तो ठीक है, नहीं है तो परिसर में दुकान लगाने वाले किसी भी व्यापारी को वीडियो काल करके माता के दर्शन कराने की गुजारिश की जा सकती है। सिद्धार्थनगर जिले के प्रसिद्ध गालापुर धाम में यह सुविधा मंदिर पुजारी ने प्रारंभ की है। इस दर्शन के एवज में भक्तों से कोइ शुल्क भी नहीं चार्ज किया जा रहा है। यही नहीं डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित काली मंदिर ने अपना पूरा दानपात्र कोरोना से बचाव के लिए प्रशासन को सुपुर्द कर दिया है।

नवरात्रि में भक्‍तों को मिल रही है राहत

कोरोना का खौफ मंदिरों-मस्जिदों तक जा पहुंचा। मस्जिदों के नमाज पर जहां पाबंदी लग चुकी है वहीं मंदिरों लोग एहतियातन जाने से परहेज कर रहे हैं। मस्जिदों का तो बता नहीं, लेकिन मंदिरों ने लोगों को नवरात्रि में माता दर्शन के स्मार्ट इंतजाम कर लिए हैं। अगर आप क्षेत्र के किसी मंदिर नियमित जाते हैं और माता के प्रति आपकी श्रद्धा है तो दर्शन के लिए कोई नहीं रोक सकता। कुछ प्रसिद्ध मंदिरो में वीडियो काल करके भक्तों को दर्शन कराने का सिलसिला चल रहा है। भले ही मंदिर के दानपात्र में भक्तों का चढ़ावा न आए, लेकिन इस तकनीक से लोग अपने आराध्य के दर्शन कर पा रहे हैं।

इस मंदिर ने भी की वीडियाे कॉल की व्‍यवस्‍था

सिद्धार्थनगर के प्रसिद्ध वटवासिनी मंदिर से भी यह व्यवस्था प्रारंभ हो गई है। पुजारी की मौजूदगी में कोई भी वीडियो काल करके महाकाली के दर्शन कर सकता है। अब तो पूजन सामाग्री बेचने वाले भी वीडियो काल के जरिए माता कुछ दर्शन करा रहे हैं।  प्रसिद्व तीर्थ भारतभारी में वीडियो कालिंग के जरिए अबतक 101 लोग मातारानी के दर्शन कर चुके हैं वहीं बलुआ समय माता मंदिर में यह आंकड़ा 151 तक पहुंचने वाला है। कस्बे के दुर्गा मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर में भी अबतक 200 लोगों ने वीडियो कालिंग के जरिए माता के दर्शन किए।

ताकि घर से बाहर न निकलें लोग

गालापुर मंदिर के पुजारी पं ठाकुर प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह बेहतर सोंच है। बीमारी के खौफ से लोग घर रहें। पुजारी अथवा अन्य के माध्यम से इक्का दुक्का की संख्या में लोग वीडियो कालिंग कर माता का दर्शन कर सकते हैं। भारतभारी श्रीराम जानकी, हनुमान व देवी मंदिर के पुजारी पं. कृष्णमणि दास का कहना है कि बहुत ही अच्छा माध्यम है। लोग बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं जो स्वागत योग्य है। बलुआ समय माता मंदिर के पुजारी रामपियारे दास कहते हैं कि भक्तों ने बड़ी अच्छी तरकीब निकाली है। हर रोज तीस से चालीस लोग वीडियो कालिंग से समय माता के दर्शन कर रहे हैं।

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