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ट्रेनों में स्वच्छता पर सवाल: चूहों, तिलचट्टों के बाद अब सांपों का डर, यात्री परेशान

Published: Wed, 21 Oct 2026 07:42 AM (IST)

भारतीय ट्रेनों में आनबोर्ड हाउसकीपिंग और पेस्ट कंट्रोल की शिकायतें बढ़ रही हैं, जिससे यात्रियों को चूहों, तिलचट्टों और यहां ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ट्रेनों में हाउसकीपिंग, पेस्ट कंट्रोल की शिकायतें बढ़ीं।

  2. दादर एक्सप्रेस में चूहे, गोमतीनगर में तिलचट्टे मिले।

  3. यात्री को सांप के डर से सुरक्षा पर सवाल।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलवे प्रशासन भले ही कह रहा है कि इज्जतनगर एक्सप्रेस के यात्री को एंटीवेनम लगाने से पहले की गई स्क्रीनिंग में विष की पुष्टि नहीं हुई। यात्री को एहतियातन लखीमपुर अस्पताल में रात भर रखा गया, लेकिन यात्रियों से लगायत चिकित्सकों ने भी प्रथम दृष्टया सांप के काटने की ही आशंका जाहिर की।

रेलवे के चिकित्सक ने भी इसी आशंका में पीड़ित यात्री को अस्पताल भेजा। संयोग से विष की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन यात्री के मन से सांप का डर नहीं निकला। यात्रियों का कहना है कि शायद, काटने वाला सांप विषविहीन हो। बोगियों की सफाई-धुलाई की यही स्थिति रही तो यात्रियों को चूहों और तिलचट्टों की तरह सांप भी घूमते नजर आएंगे और यात्रियों को डराएंगे।

ट्रेनों में इधर आनबोर्ड हाउसकीपिंग और पेस्ट कंट्रोल शिकायतें भी बढ़ने लगी हैं। आठ सितंबर, 2026 को 15018 गोरखपुर-एलटीटी दादर एक्सप्रेस के यात्री अनूप सिंह ने एसी थर्ड के बी वन कोच में चूहा देखने का दावा किया। एक्स और रेल मदद एप पर खाने के पैकेट की तस्वीरें साझा करते हुए चूहे द्वारा खानपान की सामग्री को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

आरोप लगाया कि चूहे खाने की सामग्री को कुतर दिया है। आठ अगस्त को गोरखपुर के रास्ते गोड्डा से गोमतीनगर जा रही 15089 नंबर की गोड्डा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के वातानुकूलित कोचों में शाम होते ही तिलचट्टे घूमने लगे थे। रात आठ बजे के आसपास ट्रेन के बरौनी पहुंचते ही बर्थों पर बिछी बेडशीट पर भी तिलचट्टों ने कब्जा जमा लिया। बड़ी संख्या में तिलचट्टे देख यात्री दहशत में आ गए। बच्चे और महिलाओं की परेशानी बढ़ गई। वे डर के मारे बर्थ पर बैठ नहीं पा रहे थे।

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एसी थर्ड के बी फोर कोच में यात्रा कर रहीं यात्री उषा और पूर्णिमा ने त्वरित निस्तारण केंद्र के फोन नंबर 7068241412 पर शिकायत दर्ज कराई। यात्रियों ने शिकायत की तो रेलवे प्रशासन की लापरवाही सामने आईं, नहीं तो बोगियों और फाइलों के अंदर ही दब जातीं। यह तब है जब स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चल रहे हैं। लाखों-करोड़ों खर्च हो रहे हैं।

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