Indian Railway News: गिनी में चलने को तैयार शक्तिशाली भारतीय डीजल इंजन, NER ने भेजा मुंद्रा पोर्ट
मढ़ौरा कारखाना में बने डीजल इंजन अफ्रीकी देश गिनी में मालगाड़ियां लेकर दौड़ेंगे। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने दो इंजन मुंद्रा पोर्ट भेजे जहां से वे गिनी पहुंचेंगे। 4500 हार्सपावर के 143 इंजन 2028 तक भेजे जाएंगे। इन इंजनों में आधुनिक सुविधाएं हैं और ये कम प्रदूषण फैलाएंगे। गिनी में इनका उपयोग खदान से खनिज ढोने में होगा। प्रधानमंत्री ने पहले इंजन को हरी झंडी दिखाई थी।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। भारतीय डीजल इंजन अफ्रीकी देश गिनी में चलने को तैयार हैं। मढ़ौरा कारखाना में बने डीजल इंजन गिनी में मालगाड़ियां लेकर दौड़ेंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने 27 जून को दो डीजल इंजन गुजरात के मुंद्रा पोर्ट भेज दिया। मुंद्रा पोर्ट से यह इंजन जलमार्ग से होते हुए गिनी पहुंचेंगे। मढ़ौरा कारखाना में गिनी के लिए 4500 हार्सपावर के 143 डीजल इंजन तैयार किए जा रहे हैं।
भारतीय रेलवे और वेबटेक लोकोमोटिव कंपनी के साथ करार हुआ है। वर्ष 2028 तक सभी डीजल इंजन गिनी भेज दिए जाएंगे। दोनों इंजनों को मुंद्रा पोर्ट तक भेजने में पूर्वोत्तर रेलवे को ही 38 लाख रुपये की कमाई हुई है।
जानकारों के अनुसार गिनी भेजा जाने वाला डीजल इंजन कई खूबियों से भरा है। इसका नाम कोमा रखा गया है। नीले रंग वाला यह इंजन आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। गिनी के जलवायु को देखते हुए डीजल इंजन केबिन में रेफ्रिजरेटर, एसी यूनिट, माइक्रोवेव ओवन आदि की व्यवस्था की गई है।
इंजन के दोनों तरफ लोको पायलटों के लिए केबिन बनाए गए हैं। डीजल से चलने के बाद भी इन इंजनों से कम प्रदूषण फैलेगा। इसका उपयोग गिनी गणराज्य की खदान से खनिज ढोने में किया जाएगा। यह इंजन हाईस्पीड में भी नियंत्रित होकर चलेगा, जो दोनों तरफ समान गति से संचालित किया जा सकेगा।
इंजन भेजने से पहले पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर, गोंडा और वाराणसी के संबंधित अधिकारी और इंजीनियर मढ़ौरा पहुंचे थे। मढ़ौरा कारखाना में इंजन की पूरी तरह जांच-पड़ताल और परीक्षण के बाद पटेरही रेलवे स्टेशन से मुंद्रा पोर्ट के लिए रवाना किया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 जून को सिवान में आयोजित कार्यक्रम से वर्चुअल हरी झंडी दिखाकर पहले डीजल इंजन को रवाना किया था। भारतीय रेलवे की ट्रेनें अब इलेक्ट्रिक इंजन से चलने लगी हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के 100 प्रतिशत रेलमार्ग का विद्युतीकृत हो गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे में 02 नवंबर 1972 को डीजल इंजन युग की शुरुआत हुई थी। भाप की जगह डीजल इंजन चलने लगे थे। 23 नवंबर 2015 को मौर्य एक्सप्रेस पहले इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित हुई थी। अब सभी ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से ही चल रही हैं।
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