गोरखपुर-वाराणसी-प्रयागराज रूट पर चलने वाली जनरथ एसी बस जर्जर, तार सटाने पर बजता है हॉर्न, पंखे बने शोपीस
वाराणसी से गोरखपुर जाने वाली जनरथ एसी बसों की हालत बदहाल है। एसी न चलने, पंखे खराब होने और गंदगी ...और पढ़ें

जनरथ एसी बस के चालक अविनाश कुमार सिंह। जागरण
HighLights
एसी खराब, पंखे शोपीस, गंदगी से यात्री परेशान।
बसें धीमी गति से चलतीं, यात्रा में अधिक समय।
चालक अवैध प्रेशर हॉर्न का करते हैं इस्तेमाल।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। वाराणसी स्टेशन से गोरखपुर के लिए रविवार को दोपहर एक बजे यूपी 78 एफटी 7349 नंबर की जनरथ एसी बस रवाना हुई, तो गर्मी में उबल रहे यात्रियों ने राहत की सांस ली। शायद, बस रफ्तार पकड़े तो शरीर को ठंडक मिले, लेकिन शहर से बाहर निकलते ही यात्रियों की खुशी काफूर हो गई। 40 सीटर बस में 20 सवारी भी नहीं थे, इसके बाद भी गर्मी का अहसास हो रहा था। सीटों के ऊपर लगे पंखे शोपीस बने थे।
प्रयास करने के बाद भी चलने का नाम नहीं ले रहे थे, परिचालक चंदन कुमार गुप्ता कभी यात्रियों की संख्या को लेकर चिंतित दिख रहे थे तो कभी बस की रफ्तार देख सिर पकड़ रहे थे। बस 30-35 से अधिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रही थी। बस के गाजीपुर पहुंचते ही चालक अविनाश कुमार सिंह के माथे से पसीना की बूंदे टपकने लगी। कभी ब्रेक दबा रहे थे तो कभी सड़क से राहगीरों को हटाने के लिए तार सटाकर हॉर्न बजा रहे थे।
हॉर्न सटाने पर ही बजता है क्या? सवाल परिचालक के कानों तक पहुंच गई। बताने लगे, यह व्यवस्था प्रेशर हॉर्न के लिए किया गया है। प्रेशर हॉर्न नहीं रहेगा तो लोग हटेंगे नहीं। सभी चालकों ने यही व्यवस्था की है। पास बैठे यात्री से रहा नहीं गया। कहने लगे, बस की आवाज से लग रहा है कि जनरथ का सामान्य हॉर्न अंदर ही दबकर रह जाता है।
बस किसी तरह गाजीपुर से आगे बढ़ी। सीटों पर बैठे यात्रियों को घबराहट होने लगी। सीटों व फर्श पर पसरी गंदगी को झेलना मुश्किल हो रहा था। सीटों के हैंडल भी टूट चुके थे। फर्श और खिड़की के शीशों को देखकर लग रहा था कि बस की सफाई-धुलाई होती ही नहीं।
बस हिलते-डुलते बड़हलगंज पहुंची तो हाईवे देख यात्रियों का थोड़ा उत्साह बढ़ा। इसके बाद भी बस की गति नहीं बढ़ी। करीब 250 किमी की यात्रा पूरी करते हुए बस रात साढ़े आठ बजे के आसपास कचहरी स्टेशन पहुंची। वाराणसी से गोरखपुर पहुंचने में साढ़े सात घंटे लग गए। कमर पकड़े यात्री बस से नीचे उतरे, जनरथ एसी को कोसते गंतव्य की ओर रवाना हो गए।
वाराणसी-गोरखपुर हाईवे को मुंह चिढ़ा रहीं जनरथ बसें
चंद्र मोहन, मनीष और चंचल आदि यात्रियों का कहना था, जनरथ बसें वाराणसी-गोरखपुर की सड़कों व हाईवे को मुंह चिढ़ा रहीं हैं। काशी ही नहीं गोरखपुर के राप्तीनगर डिपो में चलने वाली जनरथ बसें भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। पिछले सप्ताह ही कचहरी बस स्टेशन की एक बस का चक्का खराब होने पर यात्रियों को विरोध जताना पड़ा था। यात्री, दूसरी बस से आगे के लिए रवाना हुए।
जानकारों का कहना है कि जनरथ बसों की आयु दस साल निर्धारित है। अधिकतर बसें आठ से नौ साल में जर्जर हो चुकी है। राप्तीनगर डिपो से जर्जर सात बसें नीलाम हो चुकी हैं। एक वर्ष के अंदर 15 से 20 बसें नीलाम हो जाएंगी।
गोरखपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह बताते हैं, पुरानी हो चुकी बसों में कुछ समस्याएं आ रही हैं। निर्धारित समय पर मरम्मत करायी जाती है। आयु पूरी होने पर नीलाम कर दी जाती हैं। गोरखपुर को बड़ी संख्या में नई जनरथ बसें मिली हैं।
बसों में प्रेशर हॉर्न मान्य नहीं
जनरथ एसी, साधारण या रोडवेज की किसी भी बस में प्रेशर हॉर्न अधिकृत नहीं है, लेकिन चालक-परिचालक अपने हिसाब से प्रेशर हॉर्न लगाकर चलते हैं, ताकि तेज आवाज से उन्हें रास्ता मिल सके। जानकारों का कहना है कि बसों में जो हॉर्न लगकर आते हैं वे चालकों के मनमाफिक नहीं होते, तेज आवाज नहीं करते। भीड़ में हॉर्न की आवाज लोगों तक नहीं पहुंच पाती है।
