गोरखपुर चिड़ियाघर के वन्यजीवों को नहीं मिल रहे गोद लेने वाले, योजना पड़ी ठंडी
गोरखपुर चिड़ियाघर के वन्यजीवों को इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कोई गोद लेने वाला नहीं मिला है, जिससे चिड़ियाघर ...और पढ़ें

गोरखपुर चिड़ियाघर। जागरण
HighLights
इस वर्ष गोरखपुर चिड़ियाघर के वन्यजीवों को गोद नहीं लिया गया।
व्यक्ति या संस्थाएं जानवरों को गोद लेकर भोजन का खर्च उठाती हैं।
बाघ पर सर्वाधिक, मोर पर सबसे कम दैनिक खर्च आता है।
सुनील सिंह, गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) के वन्यजीवों को इस वर्ष अभी तक गोद लेने वाले नहीं मिले हैं। पूर्व के वर्षों में व्यक्ति या संस्थाएं गोद लेकर उनके भोजन के मद में होने वाले खर्च की धनराशि चिड़ियाघर के खाते जमा करते रहे हैं। बोर्ड पर उनका नाम डिस्प्ले किया जाता है।
वन्यजीव अंगीकरण योजना के तहत चिड़ियाघर में रहने वाले वन्यजीवों को कोई भी व्यक्ति या संस्था तीन, छह व एक साल के लिए गोद ले सकती है।
गोद लेने वाले व्यक्ति या संस्था को गोद लेने वाले वन्यजीव के लिए निर्धारित भोजन की रकम को देना होता है। इस वर्ष अभी तक कोई भी व्यक्ति या संस्था की ओर से इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है। इस वजह से चिड़ियाघर प्रशासन पर ही पूरा बोझ है।
इससे पूर्व वित्तीय वर्ष 2021-22 में नवनीत जिंदल व डा. विमलेश पासवान, वर्ष 2023-24 में रचना धुलिया, खुशबू मोदी, श्वेता अग्रवाल, रोटरी यूफोरिया, वर्ष 2024-25 में एआरसी स्केच डिजाइन एंड प्लानर, वर्ष 25-26 में अंकिता सिंह ने रुपये जमा कर कुछ वन्यजीवों को गोद लिया था। वर्ष 2022-23 में भी कोई व्यक्ति या संस्था किसी वन्यजीव को गोद नहीं लिया था।
यह है जानवरों के गोद लेने की प्रक्रिया
जानवरों को गोद लेने के लिए व्यक्ति अथवा संस्था को चिड़ियाघर में आवेदन देना होता है। उसमें बताना होता है कि किस जानवर को कब से कब तक के लिए गोद लेना चाहते हैं। उन्हें उस अवधि तक की धनराशि शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान गोरखपुर सोसाइटी के खाते में जमा करनी पड़ती है।
धनराशि चेक, बैंक ड्राफ्ट, आरटीजीएस के माध्यम से सोसाइटी के खाते में जाती है। धनराशि प्राप्त होने के 10 दिन बाद से गोद लिए जाने की योजना लागू होती है। इसके तहत गोद लेने वाले व्यक्ति को तीन माह के लिए छह, छह माह के लिए 12 व एक वर्ष के लिए 18 विशेष टिकट चिड़ियाघर घूमने के लिए दिए जाते हैं।
तीन माह तक जानवरों को गोद लेने वाले को छह टिकट दिया जाता है। व्यक्ति जिस जानवर को जिस समय के लिए गोद लेगा, उस समयावधि तक उसका नाम संबंधित जानवर के बाड़े पर डिस्प्ले किया जाएगा। इसके साथ ही गोद लेने वाले व्यक्ति को चिड़ियाघर की तरफ से प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।
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सबसे अधिक बाघ व सबसे कम मोर पर है खर्च
चिड़ियाघर में रहने वाले बाघ या बब्बर शेर पर प्रतिदिन सबसे अधिक 2301 रुपये खर्च आता है। सबसे कम खर्च मोर पर 49 रुपये है। इसके साथ ही तेंदुआ या लकड़बग्घा पर 753, भेड़िया पर 551, गैंडा व दरियाई घोड़ा पर 849, बारहसिंगा या सांबर पर 166, चीतल, पाढ़ा, काकड़ व काला हिरण पर 95, सियार व जंगली बिल्ली 252, लोमड़ी पर 126, जेब्रा पर 644, बंदर पर 82, भालू पर 589, सेही पर 63, 10 काकाटील पर 66, 10 देशी तोते पर 99, कछुआ घर पर 219, मगरमच्छ पांड पर 548 व घड़ियाल पांड पर 110 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है।
