गोरखपुर के सुथनी में 60 हजार टन कूड़े का पहाड़, भुगतान न मिलने से ठप हुआ निस्तारण
गोरखपुर के सुथनी में निर्माणाधीन इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में कचरा निस्तारण का काम ठप हो गया है। भुगतान लंबित ...और पढ़ें

10 सितंबर से फर्म ने बंद किया कचरा निस्तारण। जागरण
HighLights
सुथनी में कचरा निस्तारण का काम भुगतान न होने से रुका।
फर्म का 4.50 करोड़ रुपये का भुगतान मार्च से लंबित है।
परिसर में 60 हजार टन से अधिक कचरा जमा हुआ।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सहजनवा के सुथनी में 40 एकड़ क्षेत्र में निर्माणाधीन देश की पहली इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी-कम-लर्निंग सेंटर में फ्रेश वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था फिलहाल बेपटरी हो गई है। निस्तारण का काम कर रही होराइज सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड का करीब 4.50 करोड़ रुपये भुगतान मार्च माह से अब तक लंबित है।
भुगतान नहीं मिलने के कारण फर्म ने 10 सितंबर से निस्तारण का काम बंद कर दिया है। इसके बाद रोज पहुंच रहे 500 टन से अधिक फ्रेश वेस्ट को एक ही स्थान पर एकत्र किया जा रहा है। इससे परिसर में करीब 60 हजार टन कचरे का ढेर खड़ा हो गया है।
महानगर से प्रतिदिन 500 टन से अधिक फ्रेश वेस्ट निकलता है। 24 मई से जमुआड़ में कचरा डंपिंग बंद होने के बाद इसका पूरा भार सुथनी पर आ गया है। चरगावां और लालडिग्गी गारबेज ट्रांसफर स्टेशन से कैप्सूल, डीसीएम और डंपर के जरिये हर दिन बड़ी मात्रा में कचरा यहां पहुंच रहा है। नगर निगम की चार पोकलेन मशीनें कचरे को एक स्थान पर समेटने में लगी हैं, जिससे लगातार बढ़ रहे कचरे के पहाड़ को फिलहाल फैलने से रोका जा रहा है।
फरवरी तक ही हुआ भुगतान
जमुआड़ में फ्रेश वेस्ट का निस्तारण करने वाली होराइज सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने स्थानीय नागरिकों के विरोध के बाद सुथनी में दो ट्रामल मशीनें लगाकर कचरा निस्तारण शुरू किया था। इसके लिए फर्म को 505 रुपये प्रति टन की स्वीकृत दर मिलनी थी। हालांकि, फरवरी तक ही भुगतान हो सका। इसके बाद करीब 4.50 करोड़ रुपये बकाया होने से निस्तारण कार्य बंद हो गया।
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निगम का अपना प्लांट भी नहीं हुआ शुरू
फ्रेश वेस्ट के निस्तारण के लिए सुथनी में गीडा के सहयोग से बायो ट्रामल प्लांट लगाने की योजना है। इसकी मशीनें मौके पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक इंस्टालेशन नहीं हो सका है। वहीं एनटीपीसी का चारकोल प्लांट भी अभी संचालित नहीं हो पाया है। ऐसे में प्रतिदिन पहुंच रहे कचरे के निस्तारण के लिए फिलहाल प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन सकी है।
