अब संपत्ति की रजिस्ट्री कराते समय नहीं फंसेगा शुल्क का लेन-देन, बदलेगी ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था
गोरखपुर में संपत्ति रजिस्ट्री के ऑनलाइन शुल्क भुगतान में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू होगी।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
ऑनलाइन रजिस्ट्री शुल्क भुगतान में पैसे फंसने की समस्या समाप्त होगी।
रजिस्ट्री विभाग ने भारतीय स्टेट बैंक से अनुबंध किया है।
नई व्यवस्था से दोबारा शुल्क जमा करने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए ऑनलाइन शुल्क जमा करने की प्रक्रिया जल्द आसान होने वाली है। ऑनलाइन आवेदन के दौरान बैंक खाते से रुपये कट जाने और रसीद नहीं बनने की स्थिति में अब दोबारा शुल्क जमा करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
रजिस्ट्री विभाग ने इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से अनुबंध किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया राजकोष के बजाय बैंक के माध्यम से होगी।
फिलहाल रजिस्ट्री शुल्क ऑनलाइन जमा करने पर रकम कोषागार के पोर्टल राजकोष में जाती है। कई बार खाते से रुपया कट जाता है, लेकिन रसीद नहीं बनती। ऐसे में रजिस्ट्री कराने के लिए लोगों को दोबारा शुल्क जमा करना पड़ता है। एक भुगतान से रजिस्ट्री होने के बाद पहले फंसे भुगतान की रकम वापस पाने में भी कई लोगों को परेशानी होती है।
जिले की सात तहसीलों में आठ सब रजिस्ट्रार कार्यालय हैं। इनमें हर माह करीब 20-25 ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में रकम फंसने की शिकायतें मिल रही हैं। अकेले तहसील सदर में आठ से 10 मामले सामने आ रहे हैं।
रजिस्ट्री की पूरी तैयारी करने के बाद भुगतान अटकने पर लोग दूसरी बार शुल्क जमा कर देते हैं। इससे तत्काल आर्थिक परेशानी होती है और पहले भुगतान की वापसी के लिए अलग से शिकायत करनी पड़ती है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि प्राय: मुवक्किल के रुपये ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में फंस जाते हैं। ऐसे में ट्रांजेक्शन डिटेल, नोटरी चालान, आधार और पैन कार्ड के साथ शिकायत करनी होती है, लेकिन समय से रकम वापस नहीं मिली।
अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने नई व्यवस्था को अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि एक ही आवेदन पर दो बार शुल्क जमा होने और एक भुगतान से रजिस्ट्री होने पर दूसरे भुगतान की वापसी में दिक्कत आती है।
बैंक से सीधे होगा समाधान: एआईजी
एआईजी स्टांप एवं पंजीयन बृजेश पाठक ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन में ट्रांजेक्शन के लिए शासन स्तर पर विभाग और एसबीआइ से एमओयू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द नई व्यवस्था लागू होगी।
इसके बाद राजकोष के बजाए बैंक के माध्यम से कार्य होगा और ट्रांजेक्शन में रुपये फंसने की समस्या से रजिस्ट्री में आने वाली दिक्कत दूर हो जाएगी। इससे संपत्ति खरीदने वालों को दोबारा शुल्क जमा करने और फंसी रकम की वापसी के लिए परेशान होने से राहत मिलेगी।
