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उत्तर प्रदेश में 28 हजार शिक्षामित्रों को अब भी मूल विद्यालय लौटने का इंतजार, सिर्फ पांच जिलों को मिला लाभ

Published: Sat, 03 Oct 2026 09:11 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में 28 हजार शिक्षामित्रों को अभी भी अपने मूल विद्यालय लौटने का इंतजार है, जबकि शासनादेश के बावजूद केवल पांच जिलों में ही कुछ को लाभ मिला है।

28 हजार शिक्षामित्रों को अब भी मूल विद्यालय लौटने का इंतजार।

28 हजार शिक्षामित्रों को अब भी मूल विद्यालय लौटने का इंतजार।

HighLights

  1. 28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय वापसी का इंतजार।

  2. पांच जिलों में ही लगभग दो हजार शिक्षामित्रों को लाभ।

  3. प्रक्रिया में देरी से महिला शिक्षामित्रों को परेशानी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के करीब 28 हजार शिक्षा मित्र अब भी अपने मूल विद्यालय लौटने का इंतजार कर रहे हैं। शासनादेश जारी होने के बावजूद अभी तक केवल बाराबंकी, लखनऊ, अंबेडकरनगर, चित्रकूट और बरेली में ही करीब दो हजार शिक्षा मित्रों को इसका लाभ मिल सका है। बाकी जिलों में प्रक्रिया आगे न बढ़ने से शिक्षामित्रों में नाराजगी है। सबसे अधिक परेशानी महिला शिक्षामित्रों को उठानी पड़ रही है।

शिक्षामित्रों को पहले शिक्षक पद पर समायोजित किया गया था, लेकिन वर्ष 2017 में समायोजन रद होने के बाद उन्हें फिर शिक्षामित्र बना दिया गया। जून 2018 में शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षामित्र इससे छूट गए।

इसके बाद करीब सात वर्ष तक मूल विद्यालय वापसी की मांग को लेकर संघर्ष चलता रहा। पिछले वर्ष जनवरी में शासन ने शासनादेश जारी कर छूटे हुए शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय भेजने के निर्देश दिए।

इसके अनुसार शिक्षामित्रों को उन्हीं ग्राम पंचायतों में स्थित मूल विद्यालयों में वापस भेजा जाना है, जहां उन्हें उनके निवास स्थान के आधार पर शिक्षामित्र पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बावजूद अधिकांश जिलों में अभी तक इसका लाभ नहीं मिल सका है।

मूल विद्यालय से दूर तैनाती का सबसे अधिक असर महिला शिक्षामित्रों पर पड़ रहा है। विवाह के बाद दूसरे जिले में रहने वाली कई महिला शिक्षामित्रों को अपने मायके वाले जिले में लंबी दूरी तय कर रोजाना विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है। कुछ को नौकरी के कारण मायके में ही रहना पड़ रहा है।

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