इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन और कृषि में भी पीएचडी कराएगा गोरखपुर विश्वविद्यालय, शोध अध्यादेश में व्यापक संशोधन की तैयारी
गोरखपुर विश्वविद्यालय अब इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय प्रशासन शोध अध्यादेश में संशोधन कर रहा है, जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे। इस कदम से विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने शोध के क्षेत्र में बड़ा और उपयोगी निर्णय लिया है। निर्णय के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन और कृषि जैसे लोकप्रिय विषयों में पीएचडी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इससे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्रों को न केवल नए अवसर मिलेंगे बल्कि दूर-दराज के विश्वविद्यालयों का रुख करने की मजबूरी भी खत्म होगी। इसे लेकर प्रस्ताव विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयार कर लिया है। जल्द कार्य परिषद से स्वीकृति लेने की तैयारी है।
इस पहल के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन अपने शोध अध्यादेश में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रहा है, ताकि इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पीएचडी शुरू कराने की औपचारिक शुरुआत की जा सके। बीते सत्र में ही विश्वविद्यालय ने संविदा शिक्षकों को सह-पर्यवेक्षक के रूप में शोध कराने की अनुमति देकर शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए नई राह खोली थी। अब शोध अध्यादेश को और व्यापक बनाकर नए विषयों को सम्मिलित करने की प्रक्रिया तेज की है।
पिछले वर्षों में विश्वविद्यालय ने कृषि, इंजीनियरिंग और फार्मेसी पाठ्यक्रम शुरू किए, जिसे विद्यार्थियों ने हाथोंहाथ लिया। यानी यह पाठ्यक्रम लोकप्रिय साबित हुए। मैनेजमेंट पाठ्यक्रम पहले से लोकप्रिय था। विद्यार्थियों की रुचि को देखते हुए कृषि, इंजीनियरिंग और फार्मेसी में विश्वविद्यालय ने पहले पीजी की पढ़ाई का निर्णय लिया और अब उसी दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए पीएचडी शुरू करने जा रहा है। इससे स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमोंं के शिक्षकों को भी शोध-निर्देशक बनने का अवसर मिलेगा।
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पीएचडी शुरू करने से विद्यार्थियों को मिलेगा यह फायदा
इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन और कृषि पाठ्यक्रम मेंं पीएचडी शुरू होने से विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों में उच्चतर शिक्षा के लिए बड़े शहरों की रुख नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में पूर्वांचल में इंजीनियरिंग में शोध की सुविधा केवल एमएमयूटी में ही उपलब्ध है। गोरखपुर विश्वविद्यालय इसके इच्छुक विद्यार्थियों के लिए दूसरा विकल्प बनेगा। फार्मेसी में तो आसपास के जिलों में कहीं भी पीएचडी करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, प्रबंधन और फार्मेसी में शोध कार्यक्रम शुरू करने के लिए विस्तृत खाका तैयार किया जा चुका है। जल्द इसकी शुरुआत के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर विधिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रस्ताव की अंतिम स्वीकृति के लिए कार्य परिषद की बैठक बुलाई जाएगी। नए शोध केंद्रों के शुरू होने से विश्वविद्यालय शोध की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ेगा और क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा के और बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगा। इसके लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल्यों को धरातल पर उतारा जाएगा।
प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय

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