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गोरखपुर रिंग रोड: मुआवजे के लिए कागजातों की अड़चन, आधी से कम भीड़ पहुंची GDA

Published: Thu, 05 Nov 2026 08:48 AM (IST)

गोरखपुर ताल रिंग रोड परियोजना के लिए मुआवजे में अभिलेखों की कमी बाधा बन रही है। जीडीए की सुनवाई में ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. मुआवजे के लिए भू-धारकों ने नहीं दिए जरूरी अभिलेख।

  2. जीडीए की सुनवाई में आधे से कम भू-धारक ही पहुंचे।

  3. भू-धारकों ने कम मुआवजे का आरोप लगाते हुए प्रत्यावेदन सौंपा।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ताल रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन देने वाले भू-धारकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में अभिलेखों की कमी बाधा बन रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बुधवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) कार्यालय में हुई सुनवाई के दौरान 109 याचिकाकर्ताओं में से केवल 58 ही पहुंचे।

हालांकि, उपस्थित भू-धारकों ने मुआवजा भुगतान के लिए जरूरी अभिलेख और प्रपत्र उपलब्ध नहीं कराए। इसके बजाय उन्होंने समिति के समक्ष संयुक्त प्रत्यावेदन सौंपा, जिसका प्राधिकरण परीक्षण कर रहा है। वहीं भू-धारकों का कहना है कि उन्हें कम मुआवजा दिया जा रहा है, जो स्वीकार नहीं है।

यह सुनवाई हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका ( मंजू सिंह एवं 108 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य) में 24 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में हुई। इसके लिए जीडीए ने संबंधित भू-धारकों को पहले ही कार्यालय में उपस्थित होकर जरूरी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

भू-मूल्य निर्धारण और भुगतान के लिए मांगे गए अभिलेख
जीडीए की ओर से भू-धारकों से स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, हिस्सा प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते का विवरण मांगा गया था। इन अभिलेखों के आधार पर जमीन के मूल्य की गणना, विक्रय विलेख का निष्पादन और मुआवजे की धनराशि सीधे संबंधित खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जानी है। प्राधिकरण के अनुसार, उपस्थित भू-धारकों ने अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। उनकी ओर से दिए गए संयुक्त प्रत्यावेदन का परीक्षण किया जा रहा है।

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89 भू-धारकों की जमीन की हो चुकी है रजिस्ट्री
सुनवाई के दौरान राजस्व प्रशासन की ओर से लेखपाल और नायब तहसीलदार मौजूद रहे। जीडीए की ओर से गठित समिति के पदाधिकारी और संबंधित अनुभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे। पूरी कार्यवाही की सीसीटीवी और वीडियो रिकार्डिंग कराई गई, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। प्राधिकरण ने बताया कि ताल रिंग रोड परियोजना के लिए अब तक आपसी सहमति के आधार पर 89 भू-धारकों से जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

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