गोरखपुर में दवाओं पर 70 प्रतिशत तक छूट, राहत या नकली दवाओं का छलावा
गोरखपुर में दवाओं पर 30-70% तक की भारी छूट देने वाले मेडिकल स्टोरों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि खरीद ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
दवाओं की खरीद मूल्य और एमआरपी में भारी अंतर।
मेडिकल स्टोरों द्वारा 30-70% तक छूट देना संदिग्ध।
नकली या अधोमानक दवाओं की बिक्री की आशंका।
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) विभाग की ओर से प्रदेश के 214 अस्पतालों की फार्मेसियों की जांच में दवाओं की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच भारी अंतर ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 74 रुपये की खरीद वाला इंजेक्शन 4980 रुपये एमआरपी पर बेच कर ग्राहकों की जेब पर डाका डाला जाना चौंकाता है।
इसी धंधे का एक और पहलू है-दवा पर 70% तक डिस्काउंट देने का दावा। वह भी तब जब दवा के धंधे में रिटेलरों को 16 से 22 प्रतिशत तक मार्जिन फिक्स है। ऐसे में खुलेआम बोर्ड लगाकर तीन चौथाई से दो तिहाई तक कम कीमत पर कैसे बिक रही हैं, यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
बेतियाहाता में 30, अलहदादपुर में 30 से 70 तो जिला अस्पताल रोड और भालोटिया मार्केट में 25 से 30 प्रतिशत छूट का दावा देकर दवाएं बेची जा रही हैं। ऐसे लुभावने छूट के बोर्ड लगाकर बहुत से मेडिकल स्टोर शहर में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं।
वहीं दवाओं के धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक, ऐसा करना व्यावाहरिक रूप से संभव नहीं, क्योंकि अधिकांश दवाओं पर मार्जिन फिक्स है। 16 से 22 प्रतिशत तक फिक्स मार्जिन के बाद भी कोई रिटेलर 50 या 70 फीसद डिस्काउंट दे रहा है, तो निश्चित रूप से वह सवालों के घेरे में है।
असली के नाम पर नकली तो नहीं
आगरा, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में बहुत बड़ी मात्रा में नकली दवाएं इधर लगातार पकड़ी गई हैं। दूसरे प्रदेशों से नकली दवाओं की खेप लाकर प्रदेश में खपाने के कई मामले भी पिछले दिनों सामने आ चुके हैं। इसे लेकर प्रदेश सरकार भी गंभीर है। इसीलिए विगत कुछ महीनों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली, अधोमानक व नशीली दवाइयों को लेकर एफएसडीए के आयुक्त रोशन जैकब के आदेश पर कई टीमें गठित कर प्रदेशभर में लगातार प्रभावी कार्रवाई हो रही है, जिसमें भारी मात्रा में नकली /मिसब्रांडेड दवाइयां जब्त कर लाइसेंस निरस्त कर जेल भेजने की कार्रवाई हुई है। ऐसे में भारी डिस्काउंट वाली दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह के घेरे में है।
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ब्रांडेड और जेनरिक का खेल
दवाओं के इस धंधे में ब्रांडेड और जेनरिक का भी अलग खेल है। ब्रांडेड दवाओं में मार्जिन फिक्स है, लेकिन जेनरिक में ऐसा नहीं है। सूत्रों की मानें तो कई मेडिकल स्टोरो पर डिस्काउंट के नाम पर ब्रांडेड की जगह जेनरिक दवाएं भी ग्राहकों को थमा दी जा रही हैं।
कोई दुकानदार यदि एमआरपी के अंदर दवा बेचता है तो उस पर खाद्य एवं औद्यधि प्रशासन की टीम कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। हालांकि, खरीद मूल्य और अधिकतम खुदरा मूल्य को लेकर टीम गोपनीय रिपोर्ट बनाकर केंद्र से साझा कर रही है, जिसके आधार पर निकट भविष्य में कुछ ठोस कार्रवाई हो सकती है।
दवा की मार्जिन फिक्स है। उसके बावजूद 30 से 70% तक की छूट देना संभव नहीं है। फिर भी कई दुकानदार बोर्ड लगाकर छूट दे रहे हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए की आखिर इतनी छूट कैसे दे रहे हैं, जोकि बिना कंपनी बदले या नकली दिए बिना संभव नहीं है।
- आलोक चौरसिया, महामंत्री दवा विक्रेता समिति
