गोरखपुर में जीवित बलिराम को सिस्टम ने मृत घोषित कर रोकी पेंशन, न्याय की गुहार
गोरखपुर के बांसगांव ब्लॉक में बलिराम को सत्यापन में मृत घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी वृद्धावस्था पेंशन रुक गई ...और पढ़ें
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तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बलिराम को सत्यापन में मृत घोषित कर पेंशन रोकी गई।
जीवित होने के प्रमाण के बावजूद समस्या का समाधान नहीं।
नए नियमों से 21 हजार वृद्धावस्था पेंशन आवेदक प्रभावित।
सुनील सिंह, गोरखपुर। सिस्टम की एक गलती किसी व्यक्ति के लिए कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है, इसका उदाहरण बांसगांव ब्लाक के बढ़ैपुरवा गांव के बलिराम हैं। जीवित होने के बावजूद सत्यापन में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। इसका खामियाजा उन्हें अपनी वृद्धावस्था पेंशन गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। अब वह खुद को जीवित साबित करने और वृद्धावस्था पेंशन दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
बांसगांव के बलिराम को पिछले कई वर्ष से वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। 25 सितंबर 2025 को सत्यापन में पंचायत सेक्रेटरी ने उन्हें मृत दर्ज कर दिया। इसके बाद समाज कल्याण विभाग की ओर से उनको मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई। पेंशन बंद होने से बलिराम के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। जिस सरकारी व्यवस्था से उन्हें सहायता मिलनी चाहिए, उसी व्यवस्था में दर्ज एक गलत जानकारी के कारण वह अपने हक से वंचित हो गए हैं।
बलिराम बताते हैं कि पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। एक बेटा है, लेकिन वह अभी कुछ काम नहीं करता है। खेत भी नहीं है। मजदूरी कर जीविका चलाते हैं। पेंशन से मदद मिल जाती थी। इसेे एक साल से मृत बताते हुए रोक दिया गया है।
जीवित होने का दे रहे प्रमाण, नहीं हो रही सुनवाई
खुद को जीवित बताते हुए बलिराम अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वह समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। आइजीआरएस पर शिकायत दर्ज कर जिंदा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभिलेखों में दर्ज गलत ठीक नहीं हो पा रही है। इस वजह से उनकी पेंशन दोबारा शुरू नहीं हो पा रही है।
नए नियम में फंसी है 21 हजार आवेदकाें की वृद्धावस्था पेंशन
वृद्धावस्था पेंशन के लिए आयु का आधार बदलने से 21 हजार से अधिक आवेदकों की पेंशन फंस गई है।उम्र से संबंधित नए प्रमाण लगाने के बाद ही वह वृद्धावस्था पेंशन के हकदार हो सकेंगे।
समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन के लिए आधार कार्ड पर अंकित जन्मतिथि को ही आधार मानकर पेंशन शुरू कर दी जाती थी, लेकिन अब आधार कार्ड को आधार नहीं माना जा रहा है। वृद्धावस्था पेंशन के लिए ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों को परिवार रजिस्टर की नकल व शैक्षिक प्रमाण पत्र देना होगा।
इसके बगैर आवेदन करने वालों को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलेगी। वहीं, शहरी क्षेत्र के लिए राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट व पैन कार्ड पर अंकित जन्मतिथि को उम्र का आधार माना जा रहा है।
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ग्रामीण व शहरी मिलाकर 21 हजार नए आवेदक हैं। इनकी पेंशन अभी विभाग की ओर से शुरू नहीं कराई गई है। विभाग की ओर से जांच कराकर उनसे सही प्रमाण लगवाया जाएगा। इसके बाद ही पेंशन शुरू हो सकेगी। वहीं, पूर्व से पेंशन पाने वाले 1.73 लाख वृद्धजन को पूर्ववत पेंशन मिल रही है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार ने बताया कि उम्र के प्रमाण के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में अलग-अलग प्रमाण पत्र तय किए गए हैं। यह ही उनकी वृद्धावस्था पेंशन के लिए आधार हैं।
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