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गोरखपुर में बच्चों का भविष्य बिगाड़ रहा 'डिजिटल नशा', घातक साबित हो रहा मोबाइल का नशा

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:54 AM (IST)

गोरखपुर में बच्चों में मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बन गई है, जो उनकी भूख, नींद और पढ़ाई को ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. मोबाइल की लत बच्चों की दिनचर्या बिगाड़ रही है।

  2. लाइक-कमेंट कम मिलने से बच्चे अवसाद में आ रहे।

  3. अभिभावक स्क्रीन टाइम निर्धारित कर निगरानी करें।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मोबाइल की चमकती स्क्रीन बचपन पर भारी पड़ने लगी है। कुछ देर मनोरंजन के लिए हाथ में दिया गया मोबाइल कब उनकी जरूरत और फिर लत बन जाता है, इसका अहसास स्वजन को तब होता है, जब बच्चे उसके बिना बेचैन होने लगते हैं। मोबाइल की लत बच्चों की भूख-प्यास, नींद और पढ़ाई को प्रभावित कर रही है।

इंटरनेट मीडिया पर लाइक और कमेंट कम मिलने से कुछ बच्चे अवसाद की चपेट में आ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो रही है कि मोबाइल छीनने पर बच्चे घर में झगड़ा करने, तोड़फोड़ करने और घर से भागने तक पर उतारू हो रहे हैं। कुछ मामलों में आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने का खतरा भी सामने आ रहा है।

जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में भी ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनका उपचार चल रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल को केवल बच्चों की जिद या अनुशासनहीनता समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। जब बच्चा मोबाइल के बिना सामान्य व्यवहार नहीं कर पाता, चिड़चिड़ा रहने लगता है या उसकी दिनचर्या प्रभावित होने लगती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

इंटरनेट मीडिया के दौर में बच्चों के लिए दूसरे लोगों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। पोस्ट पर लाइक और कमेंट कम मिलने पर वे खुद को दूसरों से कमतर समझने लगते हैं। लगातार दूसरों से तुलना करने की आदत उनके आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती है।

वहीं, देर रात तक मोबाइल देखने से नींद प्रभावित होती है। इसका असर अगले दिन की दिनचर्या, एकाग्रता और पढ़ाई पर पड़ता है। कई बच्चे खेलकूद और परिवार के साथ समय बिताने के बजाय स्क्रीन में ही उलझे रहते हैं।

मोबाइल दें, निगरानी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मोबाइल उपलब्ध कराने के साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्हें यह देखना चाहिए कि बच्चा मोबाइल पर कितना समय बिता रहा है और किस तरह की सामग्री देख रहा है। छोटी उम्र से ही स्क्रीन इस्तेमाल करने की स्पष्ट समय-सीमा तय करना जरूरी है। बच्चों को खेलकूद, किताबों और परिवार के साथ बातचीत के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।

बच्चों को बनाना होगा मानसिक रूप से मजबूत
बच्चों को हर इच्छा पूरी होने की आदत डालने के बजाय उन्हें असफलता, निराशा और असहमति स्वीकार करना सिखाना जरूरी है। उन्हें समझाना होगा कि जीवन में हर चीज मनचाही नहीं मिल सकती। मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करने पर बच्चे की परेशानी को केवल डांट या सजा से दूर करने की कोशिश करने के बजाय उससे संवाद करना चाहिए। यदि बच्चा लगातार उदास रहे, आक्रामक व्यवहार करे या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात कहे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

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मोबाइल की लत से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

  • स्क्रीन टाइम निर्धारित करें
  • खुद भी बनें उदाहरण
  • खेलकूद के लिए करें प्रेरित
  • बच्चों से संवाद करें
  • इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर रखें नजर
  • जिद के आगे न झुकें, लेकिन संवेदनशील रहें
  • जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें
  • लत पड़ गई है तो अचानक मोबाइल न छीनें

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बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल को गंभीरता से लेने की जरूरत है। अभिभावकों को मोबाइल के उपयोग पर निगरानी रखने के साथ बच्चों को सहनशील बनाना चाहिए। उन्हें हर परिस्थिति का सामना करना सिखाएं और मनचाही चीज न मिलने पर भी सहज रहने की आदत विकसित करें।

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-डा. अमित कुमार शाही, मानसिक रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल