लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का असलहा सप्लायर 'बिट्टू इंदौरी' गोरखपुर में गिरफ्तार, दो पिस्टल बरामद
गोरखपुर में एसटीएफ और कैंट पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े अंतरराज्यीय असलहा तस्कर बिट्टू इंदौरी को गिरफ्तार ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। लारेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े बताए जा रहे अंतरराज्यीय असलहा तस्करी नेटवर्क की अहम कड़ी बिट्टू इंदौरी उर्फ देवेंद्र सक्सेना को एसटीएफ व कैंट थाना पुलिस की टीम ने शनिवार की शाम गिरफ्तार किया।
मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी बिट्टू जेल में बंद असलहा तस्कर श्रेयांश यादव के भाई रणधीर यादव को असलहा उपलब्ध कराने गोरखपुर पहुंचा था। टीम ने उसे कौवाबाग अंडरपास के पास दबोच लिया। उसके कब्जे से .32 बोर की दो पिस्टल, दो मैगजीन और एक कारतूस बरामद हुआ। आरोपित से पूछताछ चल रही है।
एसटीएफ के अनुसार, बिट्टू मध्य प्रदेश के सेंधवा से पिस्टल लेकर गोरखपुर आया था। उसे ये असलहे रणधीर यादव को बेचने थे। श्रेयांश की गिरफ्तारी के बाद भी उसके भाई के संपर्क में बने रहने और असलहा सप्लाई करने पहुंचने से नेटवर्क की सक्रियता का पता चला है। बिट्टू कैंट थाने में दर्ज असलहा तस्करी के मुकदमे में भी वांछित था। एसटीएफ ने कैंट पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया।
पूछताछ में बिट्टू ने बताया कि पहले वह चार पहिया वाहन चलाता था। उसकी गाड़ी से एक व्यक्ति की मौत होने के बाद उसके विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी मामले में वह मध्य प्रदेश की सेंधवा जेल में बंद हुआ था। वहां उसकी मुलाकात असलहा तस्करी के मामले में बंद श्रेयांश यादव से हुई। जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा।
इसके बाद वह श्रेयांश, उसके भाई रणधीर और उनके साथियों के लिए असलहे की व्यवस्था करने लगा। बिट्टू ने पूछताछ में बताया कि वह मध्य प्रदेश के स्थानीय कारीगरों से बोर और माडल के हिसाब से 15 से 30 हजार रुपये में पिस्टल खरीदता था। इन्हें 35 से 40 हजार रुपये में बेचता था। गोरखपुर तक असलहा पहुंचाने के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त लेता था। खरीदारों से पहले ही रकम मंगा ली जाती थी।
उसने चार से पांच वर्षों से इस धंधे में शामिल होने की बात स्वीकार की है। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि बिट्टू इंदौरी उर्फ देवेंद्र सक्सेना इंदौर के निपनियां काकड़ स्मृति कालेज रोड का रहने वाला है।आरोपित के विरुद्ध मुंबई के डीएन नगर थाने में भी मुकदमा दर्ज है। असलहा तस्करी नेटवर्क में उसकी भूमिका और अन्य संपर्कों की जांच की जा रही है।
श्रेयांश की गिरफ्तारी के बाद भाई चला रहा गिरोह
बिट्टू ने एसटीएफ को बताया कि श्रेयांश की गिरफ्तारी के बाद रुपये की कमी के कारण पूर्वांचल में उसका कारोबार प्रभावित हो गया था। इसके बावजूद रणधीर यादव के संपर्क में बना रहा। रणधीर के कहने पर ही वह दो पिस्टल लेकर गोरखपुर पहुंचा था। एसटीएफ अब रणधीर के साथ ही उन लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जो मध्य प्रदेश से असलहे लाकर पूर्वांचल में खपाने में मदद करते थे।
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पहले 15 तस्कर पकड़े जा चुके हैं
एसटीएफ के मुताबिक, सितंबर में इस नेटवर्क के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर चार पिस्टल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद अलग-अलग कार्रवाई में 15 अन्य तस्करों को भी पकड़ा गया। बिट्टू की गिरफ्तारी से नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई आगे बढ़ी है। एसटीएफ और कैंट पुलिस अब रणधीर यादव समेत अन्य आरोपितों की तलाश कर रही है जिसमें दारोगा का बेटा,नेता के करीबी व पीएसी के सिपाही भी शामिल हैं।
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