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पूर्वांचल में अवैध असलहा फैक्ट्रियों का जाल पुलिस के लिए चुनौती, निगरानी पर उठे सवाल

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:49 PM (IST)

पूर्वांचल में अवैध असलहा निर्माण और तस्करी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहां हाल ही में गोरखपुर ...और पढ़ें

बस्ती, सिद्धार्थनगर व मऊ तक फैले नेटवर्क का एसटीएफ ने किया था पर्दाफाश। जागरण

 बस्ती, सिद्धार्थनगर व मऊ तक फैले नेटवर्क का एसटीएफ ने किया था पर्दाफाश। जागरण

HighLights

  1. देवरिया में अवैध असलहा फैक्टरी पकड़ी गई, स्थानीय निगरानी पर सवाल।

  2. अंतरराज्यीय गिरोह इंस्टाग्राम से 150 अवैध पिस्टल बेच चुका था।

  3. पूर्वांचल में अवैध असलहा निर्माण और तस्करी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जितेन्द्र पाण्डेय, गोरखपुर। पूर्वांचल में अवैध असलहा निर्माण और तस्करी पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। सस्ते और आसानी से उपलब्ध देशी तमंचों का अपराधों में इस्तेमाल होता रहा है। गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और मऊ में फैक्ट्रियां पकड़े जाने से इस कारोबार का नेटवर्क सामने आया है।

हाल में गोरखपुर में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद रविवार को देवरिया पुलिस ने झंगहा थाना क्षेत्र में अवैध असलहा फैक्टरी पकड़ी। दूसरे जिले की पुलिस की कार्रवाई से स्थानीय निगरानी और खुफिया तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठे हैं।

झंगहा थाना के गोबड़ौर चौकी क्षेत्र के टमठा गांव में सोहन विश्वकर्मा की झोपड़ी में फैक्टरी चल रही थी। उसके विरुद्ध वर्ष 2012 में आर्म्स एक्ट, वर्ष 2018 में बड़हलगंज में आर्म्स एक्ट और वर्ष 2025 में मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी नहीं मिली।

अवैध असलहा निर्माण का मामला नया नहीं है। 22 जून, 2020 को गोला क्षेत्र के मठिया गांव में पकड़ी गई फैक्टरी से 315 बोर के तीन तमंचे, कारतूस और उपकरण मिले थे। आजमगढ़ निवासी पतिराम और बैद्यनाथ गिरफ्तार हुए थे। एक युवक के असलहे के साथ पकड़े जाने पर मामला खुला था।

आरोपितों ने बताया था कि तमंचा बनाने के लिए एक हजार रुपये मिलते थे और तैयार तमंचा तीन से चार हजार रुपये में बिकता था। 15 मार्च, 2020 को गगहा क्षेत्र के चेड़वा में भी फैक्टरी पकड़ी गई थी। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, जनवरी से 15 जुलाई, 2020 के बीच जिले में 133 अवैध असलहे बरामद हुए, जिनमें 315 बोर के 90 तमंचे थे।

जुलाई 2018 में बस्ती के लालगंज थाना क्षेत्र के भक्तूपुर में सड़क किनारे झोपड़ी से मिनी फैक्टरी पकड़ी गई थी। वहां 12 बोर के चार और 315 बोर के दो बने तमंचे, एक अर्धनिर्मित तमंचा और उपकरण मिले थे। सितंबर 2020 में सिद्धार्थनगर के लोहरौला गांव में बाग की झोपड़ी से फैक्टरी पकड़ी गई और टाप-10 अपराधियों में शामिल फिरोज मलिक गिरफ्तार हुआ।

मऊ में गोरखपुर एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ अस्तुपुरा और शहर कोतवाली क्षेत्र के रघुनाथपुरा में छापे मारकर 200 से अधिक बने और अर्धनिर्मित असलहे बरामद किए। चार आरोपित गिरफ्तार हुए। जांच में बिहार के मुंगेर जिले के एक आरोपित की भूमिका भी सामने आई थी।

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हाल में एसटीएफ ने पांच हथियार तस्करों को गिरफ्तार कर चार पिस्टल, एक रिवाल्वर, पांच कारतूस, मैगजीन, दोपहिया वाहन और मोबाइल फोन बरामद किए। पूछताछ में गिरोह ने इंस्टाग्राम के जरिये पूर्वांचल में 150 अवैध पिस्टल बेचने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, गिरोह मध्य प्रदेश के सेंधवा और हरियाणा के सोनीपत से हथियार लाकर सप्लाई करता था। उसके तार लारेंस बिश्नोई, अनमोल बिश्नोई और अन्य गिरोहों से जुड़े होने की बात सामने आई। मामले में 31 आरोपित नामजद हैं, जिनमें कई फरार हैं।

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पुलिस कप्तानों को असलहा पकड़े जाने पर उसके स्रोत तक पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में देवरिया पुलिस ने सत्यापन के बाद झंगहा क्षेत्र में फैक्टरी पकड़ी। अन्य संदिग्ध स्थलों और पहले पकड़े गए आरोपितों की पड़ताल जारी है। तस्करों की तलाश भी की जा रही है।

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-डा. एस चनप्पा, डीआइजी रेंज