जागरण एजेंडा: गोरखपुर में जाम बढ़ा रहे 18 हजार ई-रिक्शा, बढ़ी दुर्घटना की आशंका
गोरखपुर में 18 हजार ई-रिक्शा और 20 हजार ऑटो रिक्शा भीषण जाम और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिस ...और पढ़ें
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सरकार की सुविधा को लोगों ने बना लिया व्यवसाय, एक के पास 36 ई-रिक्शा। जागरण
HighLights
गोरखपुर में 18 हजार ई-रिक्शा जाम और दुर्घटनाओं का कारण।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा की बेतहाशा वृद्धि पर चिंता जताई।
टैक्स छूट के बाद ई-रिक्शा का व्यवसायिक उपयोग बढ़ा।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूं ही नहीं ई-रिक्शा के बेतहाशा बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। गोरखपुर में ही 18 हजार ई-रिक्शा जाम का कारण बने हुए हैं। ऊपर से पहले से चल रहे 20 हजार आटो रिक्शा कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण तो बढ़ ही रहा, दुर्घटना की आशंका भी बढ़ती ही जा रही है।
ई-रिक्शा चालकों की मनमानी यातायात नियमों को मुंह चिढ़ा रही है। इनके लिए आजतक न रूट का निर्धारण हो पाया और न ही स्थायी स्टैंड बन पाया। चालक जहां चाहते हैं चल देते हैं। जहां इच्छा होती है, रोककर खड़े हो जाते हैं। रात के अंधेरे में तो बिना लाइट जलाए चलते हैं। महानगर के लोगों को न जाम से मुक्ति मिल पाई और न दुर्घटनाओं पर अंकुश लगा। महानगर की सड़कों पर राह चलना मुश्किल हो गया है।
दरअसल, अक्टूबर 2022 में टैक्स और परमिट की अनिवार्यता खत्म होने के बाद लोगों ने बड़ी संख्या में ई- रिक्शा खरीदकर किराए पर चलाने का कारोबार शुरू कर दिया। जबकि ई-रिक्शा का संचालन मुख्य रूप से कम दूरी की यात्रा को आसान बनाने, पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और पारंपरिक रिक्शा चालकों का शारीरिक श्रम कम करने के लिए शुरू किया गया था।
ई-रिक्शा की खरीद पर पंजीयन के नाम पर सिर्फ छह सौ रुपये की रसीद कटती है। अन्य सभी टैक्स माफ हैं। सरकार की इसी सुविधा को लोगों ने व्यवसाय बना लिया। लखनऊ में एक ही व्यक्ति के नाम पर 114 ई-रिक्शा हैं। गोरखपुर में ही एक व्यक्ति के नाम पर 36 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं।
अरविंद पांडेय के नाम 36 ई- रिक्शा, दिलीप शर्मा और रितिका कुमारी के नाम 12-12 ई-रिक्शा हैं। अब्दुल्ला अंसारी के पास 11, राकेश कुमार श्रीवास्तव के पास नौ और इंद्रा प्रताप मिश्रा के पास आठ ई-रिक्शा हैं। आनंद कुमार, अरविंद कुमार तिवारी, वीरेंद्र नायक, मंजू पाठक, शमसुद्दीन, उमाशंकर और शशिकांत के नाम सात-सात ई-रिक्शा पंजीकृत हैं।
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कोर्ट ने शहर में जाम का मुख्य कारण मानते हुए सरकार को प्रतिबंधित मार्गों पर इसके संचालन पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नए ई- रिक्शा के पंजीकरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। गोरखपुर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अरुणा कुमार बताते हैं कि महानगर में ई- रिक्शा के लिए जोन व रूट के निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है।
जल्द ही ई-रिक्शा का जोन व रूट निर्धारित कर दिया जाएगा। ताकि, ई-रिक्शा का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। वर्तमान में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम दो से तीन ई-रिक्शा पंजीकरण किया जा रहा है। आगे, शासन के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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