गोरखपुर में मां ने मोबाइल गेम खेलने पर डांटा तो 10 साल के मासूम ने की खुदकुशी, गांव में छाया मातम
गोरखपुर के भटहट में मां की डांट से नाराज होकर 10 वर्षीय बालक ने मोबाइल गेम खेलने के लिए फटकार ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
संवाद सूत्र, भटहट, (गोरखपुर)। गुलरिहा क्षेत्र के भैरवां गांव में मंगलवार को 10 वर्षीय बालक ने आत्मघाती कदम उठाया। मां ने मोबाइल फोन पर गेम खेलने के लिए फटकार लगाई तो वह नाराज होकर घर से चला गया। कुछ देर बाद वह घर के पीछे स्थित पेड़ से रास्सी के फंदे से लटकता मिला।
स्वजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भटहट ले गए, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस पोस्टमार्टम कराने की कोशिश की तो स्वजन मना करते हुए शव लेकर घर चले गए।
भैरवां वासी राकेश सिंह का पुत्र आयुष दूसरी कक्षा में पढ़ता था। सीएचसी में तैनात चिकित्सक डा. आशुतोष चौहान के अनुसार, स्वजन बच्चे को लेकर ओपीडी में पहुंचे तो उसे इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। जांच के दौरान बच्चा मृत मिला।
चिकित्सक की नजर उसके गले पर रस्सी के निशान पर पड़ी तो उन्होंने स्वजन से घटना के बारे में पूछा। इसके बाद परिजनों ने पूरी बात बताई। स्वजन के अनुसार, मंगलवार को स्कूल से लौटने के बाद आयुष मोबाइल फोन पर गेम खेल रहा था। इस पर मां ने उसे पढ़ाई करने के लिए कहा और डांट दिया।
इसके बाद वह नाराज होकर घर के पीछे चला गया। मां को लगा कि वह खेलने गया होगा। काफी देर तक वापस नहीं आने पर स्वजन ने तलाश शुरू की। इसी दौरान घर के पीछे पेड़ की डाल से रस्सी के फंदे से वह लटकता हुआ मिला।
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स्वजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बालक की मौत से माता-पिता समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना के संबंध में गुलरिहा पुलिस का कहना है कि सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो स्वजन ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि, पोस्टमार्टम नहीं हुआ तो यह पता कैसे चलेगा कि बालक की मौत कैसे हुई, बालक ने खुद से फंदा लगाया या किसी अन्य ने वारदात को अंजाम दिया। बच्चे को फंदा लगाने के लिए उसे रस्सी कहां से मिली, पेड़ की डाल में फंदा बांधने में उसकी मदद किसने की होगी समेत अन्य कई सवार अधूरे रह गए। हालांकि स्वजन ने शव घर ले जाने के बाद बरगदही घाट पर अंतिम संस्कार भी कर दिए। आयुष दो भाइयों में छोटा था।
