UP News: गोरखपुर AIIMS की इमरजेंसी में पहले इंतजार, फिर मिल रहा दुत्कार
गोरखपुर एम्स में न्यूरो सर्जन की कमी के चलते मरीजों को परेशानी हो रही है। घायल शांति देवी को बिना इलाज के लौटा दिया गया क्योंकि न्यूरोसर्जन उपलब्ध नहीं थे। एक अन्य मरीज सुरेश प्रसाद को भी बिना देखे ही वापस कर दिया गया। कार्यकारी निदेशक ने इमरजेंसी के बाहर बोर्ड लगाने की बात कही है ताकि मरीजों को पहले से जानकारी मिल सके और उन्हें परेशानी न हो।

दुर्गेश त्रिपाठी, जागरण, गोरखपुर। देवरिया के भाटपाररानी की 40 वर्षीय शांति देवी पत्नी रामेश्वर गौड़ सोमवार को स्वजन के साथ बाइक से कहीं जा रही थीं। ब्रेकर पर बाइक असंतुलित होने पर वह नीचे गिर गईं। इस कारण उनके सिर में चोट लग गई। स्वजन ने भाटपाररानी अस्पताल में भर्ती कराया।
वहां से उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी निजी अस्पताल में 60 हजार खर्च हो गए। रुपये नहीं बचे तो स्वजन एम्स की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां काउंटर पर कर्मचारी ने बताया कि पहले इमरजेंसी वार्ड से रसीद लेकर आइए। इसके बाद ही पर्चा बनेगा।
स्वजन ने बताया कि पर्ची लेकर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो डाक्टर बात ही नहीं सुन रहे थे। कई बार अनुरोध के बाद बात की। डाक्टर ने सुना कि सिर में चोट है तो न्यूरो का डाक्टर न होने की बात कहते हुए वापस कर दिया। यदि तत्काल बता दिया जाता कि न्यूरो के डाक्टर नहीं हैं तो समय बर्बाद नहीं होता।
एम्स की इमरजेंसी में डाक्टर न होने की जानकारी रोगियों को तत्काल नहीं दी जा रही है। जिन विभागों में डाक्टर नहीं हैं उनके बारे में भी नहीं बताया जा रहा है। रोगी टकटकी लगाए डाक्टर के आने की राह देखता रहता है और स्वजन डाक्टर के पीछे-पीछे भागकर गुहार लगाते रहते हैं। बाद में जब उन्हें बताया जाता है कि डाक्टर नहीं हैं तो वह परेशान हो जाते हैं।
न्यूरो सर्जन न होने से बढ़ रही दिक्कत
एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी में पहले न्यूरो सर्जन की तैनाती थी। आपरेशन थियेटर कम मिलने के कारण वह परेशान रहत थे। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एम्स में न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी। तकरीबन छह महीने से सिर में चोट लगने के कारण इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को रेफर किया जा रहा है। स्वजन का कहना है कि यदि तत्काल इसकी जानकारी दे दी जाती तो समय नहीं बर्बाद होता।
रोगी नहीं पर्चा देखा, कर दिया वापस
बिहार के सिवान के बड़हरिया निवासी 40 वर्षीय सुरेश प्रसाद दो वर्ष पूर्व बाइक से गिर गए थे। उनका बायां पैर टूट गया था। बाइक के गर्म साइलेंसर के कारण दाहिना पैर झुलस गया था। पैर का झुलसा हिस्सा ठीक नहीं हो रहा है। सिवान में उपचार चल रहा था।
मधुमेह के साथ ही लिवर में समस्या थी। तीन जुलाई को सिवान में खून की जांच कराने पर हीमोग्लोबिन 5.2 निकला तो डाक्टरों ने एम्स गोरखपुर में भर्ती कराने की सलाह दी। स्वजन बड़ी उम्मीद के साथ शुक्रवार शाम तकरीबन पांच बजे सुरेश प्रसाद को लेकर एम्स की इमरजेंसी पहुंचे।
इमरजेंसी में कर्मचारी को पर्चा दिखाया। इसके बाद डाक्टर ने पर्चा देखा और दूसरे अस्पताल जाने को कह दिया। भतीजे दीपक कुमार ने बताया कि तकरीबन एक घंटे तक डाक्टर से अनुरोध करता रहा कि एक बार रोगी को देख लें लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। रोगी के साले ने भी अनुरोध किया। आरोप है कि कई बार गुहार लगाने से नाराज डाक्टर ने स्वजन को फटकार लगाया और गार्ड बुलाकर इमरजेंसी से बाहर निकलवा दिया।
इमरजेंसी के बाहर लगाया जाएगा बोर्ड
कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डा. विभा दत्ता ने कहा कि यदि डाक्टर नहीं हैं तो इसकी जानकारी तत्काल स्वजन को दी जानी चाहिए। जिस विभाग में डाक्टर की उपलब्धता नहीं होगी, इमरजेंसी के बाहर बोर्ड लगाकर इसकी जानकारी दी जाएगी। किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
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