गीडा अब भारत में बना रहा है अपना प्रमुख स्थान, आठ सालों में बदली औद्योगिक विकास की सूरत
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने 36 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। अडानी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपति यहाँ अपनी फैक्ट्रियाँ स्थापित कर रहे हैं। योगी सरकार के आने के बाद गीडा का विस्तार हुआ है, जिससे प्लास्टिक पार्क, गारमेंट पार्क और आईटी पार्क जैसे कई नए उद्योग स्थापित हुए हैं। गीडा अब नोएडा से प्रतिस्पर्धा कर रहा है और हजारों रोजगार सृजित कर रहा है।

बड़े-बड़े उद्योग गीडा में स्थापित कर रहे हैं अपनी फैक्ट्री
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। 36 साल के दौरान गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) औद्योगिक क्षेत्र पहचान का मोहताज नहीं रहा।राष्ट्रीय स्तर पर गीडा औद्योगिक क्षेत्र अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। स्थिति यह है कि आज अदाणी व अंंबानी जैसे बड़े औद्योगिक घराने भी गोरखपुर में अपनी फैक्ट्री स्थापित करने जा रहे हैं। कई और बड़े उद्योग भी यहां उद्योग स्थापित करने की इच्छा जताते चुके हैं।
वर्ष 1983 में चेंबर आफ इंडस्ट्रीज की स्थापना के समय हम लोगों ने गोरखपुर को केंद्र में रखकर संपूर्ण पूर्वांचल के औद्योगिक विकास का संकल्प लिया था। 1984 में सहजनवा को केंद्र सरकार के द्वारा औद्योगिक विकास केंद्र घोषित किया एवं 1989 में प्रदेश सरकार द्वारा नोएडा की तर्ज पर औद्योगिक विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। लेकिन उसकी वास्तविक शुरुआत सितंबर 1991 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा शिलान्यास एवं पांच करोड़ रुपये की धनराशि देकर की गई। गीडा का विस्तारीकरण 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ के प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुआ। वरुण वेबरेज, अंकुर स्टील, केयान डिस्टिलरी, फ्लावर मिलें, तत्वा प्लास्टिक जैसे बड़े उद्योग स्थापति हुए। आज गीडा में प्लास्टिक पार्क, गारमेंट पार्क, आइटी पार्क, लाजिस्टिक पार्क की स्थापना के अलावा अंबानी, अदाणी जैसे प्रमुख उद्योगपतियों की उपस्थिति से गीडा भारत में अपना प्रमुख स्थान बना रहा है। -एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, चेंबर आफ इंडस्ट्रीज
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की स्थापना 1989 में हुई थी। अपने 36 वर्षों के सफ़र में पूर्वी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया है। शुरुआत में सीमित संसाधनों और कनेक्टिविटी की चुनौतियों के बावजूद गीडा ने धीरे-धीरे प्रगति की है।शुरुआती दशकों में छिटपुट निवेश देखा गया, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विकास ने गति पकड़ी है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे ने कनेक्टिविटी को बढ़ाया है, जिससे यह क्षेत्र निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो गया है। गीडा की उपलब्धियां अब केवल स्थानीय उद्योगों तक सीमित नहीं हैं।
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गीडा अब नोएडा के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है, क्योंकि बड़े औद्योगिक घरानों ने इस क्षेत्र में रुचि दिखाई है। 6,800 एकड़ से अधिक में फैले धुरियापार नए औद्योगिक टाउनशिप के विकास से भविष्य के विकास की नींव रखी गई है। अदाणी ग्रुप, रिलायंस और कोका-कोला जैसी प्रमुख कंपनियों ने यहां निवेश प्रस्ताव दिए हैं। इन 36 वर्षों में, गीडा ने एक छोटे औद्योगिक क्षेत्र से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनने तक का सफर तय किया है, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।- आरएन सिंह, अध्यक्ष, चेंबर आफ इंडस्ट्रीज

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