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    यूपी में शूटिंग के लिए फिल्म इंडस्ट्री की पहली पसंद बन रही गोरक्ष नगरी, तस्वीरों में देखें गोरखपुर का खूबसूरत स्पॉट

    By Pragati ChandEdited By:
    Updated: Sat, 18 Jun 2022 02:16 PM (IST)

    गोरखपुर सिर्फ पर्यटकों को ही नहीं फिल्म इंडस्ट्री को भी आकर्षित करने लगा है। भोजपुरी फिल्म का तो हब ही बन गया है। फिल्म इंडस्ट्री की रुझान को देखते हुए जीडीए अब शूटिंग लोकेशन तैयार कर रहा है।

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    फिल्म शूटिंग का स्पॉट बनती गोरक्ष नगरी। जागरण-

    गोरखपुर, डॉ राकेश राय। पर्यटन हब के रूप में विकसित हो रही गोरक्ष नगरी ने केवल पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं किया है। यहां के कुछ प्रमुख स्थलों की बढ़ी खूबसूरती ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान भी खींचा है। कई स्थलों की पहचान तो शूटिंग स्पाट के रूप स्थापित होती जा रही है, जहां एक के बाद एक फिल्मों की शूटिंग का सिलसिला निरंतर देखा जा रहा। भोजपुरी फिल्म बनाने वालों की तो जैसे ऐसे स्पाट की तलाश ही पूरी हो गई है। अब उन्हें भटकना नहीं पड़ रहा। हर सीन के लिए एक-दो नहीं बल्कि आधा दर्जन से अधिक स्पाट का विकल्प खुल गया है। इससे उत्साहित होकर जीडीए ने तो शूटिंग लोकेशन के जरिए फिल्मी कलाकारों को और आमंत्रित और प्रोत्साहित करने की योजना तक बना डाली है।

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    मुंबई का मरीन ड्राइव सा बन गया है रामगढ़ताल: गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने जब प्रदेश की कमान संभाली तो लंबे समय से उपेक्षा के शिकार गोरखपुर यह दंश जाता रहा। चहुंओर विकास की गंगा बहने लगी। पर्यटन को लेकर भी दर्जनों परियोजनाएं, जो शासन के दफ्तरों में धूल फांक रही थी, वह पटल पर आ गईं। दर्जनों नई योजनाओं का प्रस्ताव तैयार हुआ और वह एक-एक कर धरातल पर उतरने लगीं। रामगढ़ ताल मुंबई का मरीन ड्राइव सा बन गया तो नया सवेरा, चिड़ियाघर, वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के शुरू हो जाने की शहर की खूबसूरती में चार चांद लग गए।

    सांसद रवि किशन ने शुरू की फिल्म शूटिंग: कुसम्ही जंगल, गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, गीता वाटिका, बौद्ध संग्रहालय, जीडीए के सभी पार्क, राप्ती नदी के घाट भी सजा-संवार दिए गए। इसके चलते गोरखपुर कब फिल्म वालों का ध्यान खींचने लगा, पता नहीं चला। जब घर में ही जगह मिलने लगी तो वह भला दूर क्यों जाएं। शूटिंग का सिलसिला यहीं शुरू हो गया। सांसद रवि किशन ने जब शूटिंग स्पाट के रूप में गोरखपुर की ब्रांडिंग शुरू की, तबसे मुंबई की टीमें भी शूटिंग के लिए यहां संभावनाएं तलाशने लगी हैं। वेब सीरीज, एलबम, शार्ट फिल्मों को शूटिंग के लिए देश भर से लोग यहां आने लगे हैं।

    भोजपूरी फिल्मों का हब बना गोरखपुर: भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग का तो हब ही बन गया है अपना गोरखपुर। अगर पिछले पांच वर्ष में गोरखपुर में फिल्मी गतिविधियों पर गौर करें तो दर्जन भर से अधिक फिल्मी हस्तियों की किसी न किसी रूप में यहां दस्तक हो चुकी है और करीब इतनी ही फिल्मों की शूटिंग भी यहां हो चुकी है।

    शूटिंग लोकेशन तैयार कर रहा जीडीए: गोरखपुर के प्रति फिल्म इंडस्ट्री के रुझान देखते हुए जीडीए ने फिल्म प्रमोशन प्रकोष्ठ का गठन कर दिया है। पांच सदस्यीय प्रकोष्ठ को जिम्मेदारी दी गई है कि वह जिले के उन लोकेशन को चयन करें, जिन्हें शूटिंग लोकेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है। चिन्हिकरण के बाद वह उन स्थलों को शूटिंग के लिहाज से तैयार किए जाने की जीडीए की योजना है। इस कार्य में जीडीए सांसद रवि किशन की मदद भी ले रहा है।

    स्थल जो फिल्म वालों को भा रहे: रामगढ़ ताल व उसका किनारा, नया सवेरा, दिग्विजयनाथ पार्क, नक्षत्रशाला, बौद्ध संग्रहालय, चिड़ियाघर, सहारा इस्टेट, गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, गीता वाटिका, कुसम्ही जंगल, विंध्यवासिनी पार्क, प्रेमचन्द पार्क, लालडिग्गी पार्क, राप्ती नदी के घाट।

    भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बनाने की चल रही तैयारी: गोरखपुर के प्रति फिल्म इंडस्ट्री के बढ़ रहे रुझान से उत्साहित होकर सांसद रवि किशन ने यहां भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बनाए जाने की मांग उठाई है। उनकी मांग का सरकार ने संज्ञान भी लिया है। इसके पीछे सांसद की मंशा स्थानीय कलाकारों को अपने घर में शूटिंग की सुविधा देना है। उन्हें शूटिंग के लिए बड़े शहरों में भटकने से रोकना है। इस कार्य में उन्हें भोजपुरी फिल्म स्टार निरहुआ, खेसारी लाल यादव जैसे कलाकारों का साथ भी मिला है। रवि किशन का मानना है कि गोरखपुर में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बन जाने से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जो कलाकार अपने सपने को पूरा करने के लिए मुंबई की राह पकड़ते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ेगा।

    अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है गोरखपुर की 'संस्पेंडेड': शुक्रवार को गोरखपुर के एडी सिनेमा में रिलीज हुई फिल्म 'सस्पेंडेड' गोरखपुर में फिल्म निर्माण के बन रहे माहौल की पुष्टि है। इस फिल्म का निर्माण पूरी तरह गोरखपुर में हुआ है। कलाकार भी यहीं के हैं। फिल्म के निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक भी गोरखपुरिया फिल्मकार प्रदीप सुविज्ञ ही हैं। यहां तक कि फिल्म की डबिंग, बैंकग्राउंड म्यूजिक और गीतों की रिकार्डिंग भी स्थानीय स्टूडियो में ही हुई है। हास्य व्यंग से परिपूर्ण इस फिल्म को रिलीज होने से पहले ही 10 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें यूरोपियन फिल्म फेस्टिवल में स्वतंत्र फीचर फिल्म की श्रेणी का सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार, रोम इंटरनेशनल मूवी पुरस्कार, इस्तांबुल फिल्म पुरस्कार, वर्ड फिल्म कार्निवाल पुरस्कार भी शामिल हैं। पेरिस फिल्म फेस्टिवल और हंगरी के पैराडाइज फिल्म फेस्टिवल के लिए यह फिल्म नामित हो चुकी है।

    चर्चा में रही चौरी चौरा:एक प्रतिकार: स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल देने वाली चौरी चौरा की घटना की असलियत बताने और दिखाने वाली फिल्म चौरी चौरा : एक प्रतिकार बीते वर्ष खूब चर्चा में रही। इस फिल्म की शूटिंग पूरी तरह से गोरखपुर में हुई। निर्माता गौरव खरे और निर्देश अभीक भानू तो गोरखपुर के है हीं, कलाकार भी यहीं के रहे। गोरखपुर में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सांसद रवि किशन ने भी इस फिल्म में अभिनय किया।

    बीते दो वर्ष में गोरखपुर हुई इन फिल्मों की हुई शूंटिंग: चौरी चौरा: एक प्रतिकार, सस्पेंडेड, भैया जी ग्रेट, हमार धर्मपत्नी, दिलवर, भाग्यवान, आयुष्मान, सैयां हमार कलाकार , गोरखपुरिया रंगबाज, नाच न आवे आंगन टेढ़ा, भोजपुरिया में दम बा और वेब सीरीज 'क्राइम फाइल'।