गोरखपुर के धुरियापार के उद्योगों के लिए बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी गति
गोरखपुर के धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों के लिए आधा एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनेगा। शासन की ...और पढ़ें

उद्योगों की स्थापना से पहले ही प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी। जागरण
HighLights
धुरियापार में आधा एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनेगा।
शासन ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
यह उद्योगों के अपशिष्ट जल प्रबंधन में सहायक होगा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दक्षिणांचल के नए औद्योगिक क्षेत्र धुरियापार में उद्योगों की स्थापना के साथ ही सीवरेज प्रबंधन की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इसके लिए आधा मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। गीडा प्रशासन के इस प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिल चुकी है। इससे औद्योगिक इकाइयों के संचालन के बाद अपशिष्ट जल के निस्तारण में परेशानी नहीं होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
धुरियापार में भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां उद्योगों की स्थापना से पहले ही आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। गीडा प्रशासन के अनुसार, यहां स्थापित होने वाली अधिकांश औद्योगिक इकाइयां जीरो वाटर डिस्चार्ज की व्यवस्था पर आधारित होंगी।
यानी उद्योगों से अपशिष्ट पानी नहीं निकलेगा। फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए कम क्षमता के एसटीपी की योजना बनाई गई है।
दरअसल गीडा में कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बनाने की योजना है। जल्द ही इसके निर्माण की शुरुआत होने की संभावना है।
गीडा में सीईटीपी और धुरियापार में एसटीपी की योजना
गीडा के औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल के उपचार की व्यवस्था को लेकर कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की परियोजना भी प्रक्रिया में है। गीडा एसीईओ रामप्रकाश ने कहा कि धुरियापार में उद्योगों की प्रकृति और जीरो वाटर डिस्चार्ज की प्रस्तावित व्यवस्था को देखते हुए आधा एमएलडी क्षमता के एसटीपी की योजना बनाई गई है।
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इससे नए औद्योगिक क्षेत्र में शुरुआत से ही पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसी सुविधाएं समय से विकसित होने पर निवेश करने वाली इकाइयों को सहूलियत मिलेगी। उद्योगों के संचालन के बाद प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियों को भी कम किया जा सकेगा।
धुरियापार के मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने के साथ ही एसटीपी स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल गई है। औद्योगिक क्षेत्र में जरूरी सुविधाएं विकसित करने की योजना के तहत सीवरेज प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। इससे उद्योगों की स्थापना के बाद अपशिष्ट जल के निस्तारण में दिक्कत नहीं आएगी।
