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    खांसी ही नहीं नशा के रूप में भी होता के कफ सीरप का इस्‍तेमाल, आर्डर देकर बनवाई जाती हैं दवाएं- नेपाल तक होती है तस्‍करी

    By Pradeep SrivastavaEdited By:
    Updated: Tue, 09 Aug 2022 09:02 AM (IST)

    कप सीरप का इस्तेमाल नशा के रूप में किया जा रहा है। ऐसी दवाएं बनवाने उसे तस्करी करने और उसे बेचने के लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में दवाएं बनवाई जा रही हैं।

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    कफ सीरप का इस्तेमाल नशा के लिए किया जा रहा है। - प्रतीकात्मक तस्वीर

    गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी। दवाओं खासकर कफ सिरप का उपयोग नशे के रूप में लोग कर रहे हैं। इसका फायदा ड्रग माफिया उठा रहे हैं। गोरखपुर व महराजगंज नारकोटिक्स ग्रुप और खांसी के सिरप का हब बन गया है। बाहर से यहां दवाएं लाइसेंस पर लाई जा रही हैं और फिर लाइसेंस विभाग में सरेंडर कर नए नाम से नया बनवा लिया जा रहा है। पहले के लाइसेंस पर आई दवाओं को आसानी से बाजार में खपा दिया जा रहा है। महराजगंज और गोरखपुर में लाइसेंस सरेंडर कर दूसरा बनवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। पुराना लाइसेंस न होने के कारण जांच भी नहीं हो पाती है।

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    बिना बिल-बाउचर के मंगाया और बेचा जा रहा कफ सिरप, नशे में होता है इस्तेमाल

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में दवाएं बनवाई जा रही हैं। वहां से लखनऊ व आगरा के रास्ते थोक व्यापारियों के यहां भेजी जा रही हैं। सबसे ज्यादा कालाबाजारी कफ सिरप की हो रही है। इसका नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। गोरखपुर से बंगाल व बिहार तथा महराजगंज से नेपाल में दवाएं भेजी जा रही हैं। इसमें गोरखपुर में बैठे ड्रग माफिया संलिप्त है।

    गोरखपुर में पकड़ी गई दवा की खेप

    इनके दुस्साहस का अंदाजा लगाया जा सकता है कि खलीलालबाद, गीडा व हेतिमपुर में दवाओं की खेप पकड़े जाने के बाद दवा की थोक मंडी भालोटिया मार्केट का एक व्यापारी मामला दबाने के लिए अपने कर्मचारी के साथ 15 लाख रुपये भेज दिया। वह तो गनीमत थी कि ट्रक चालक की चालाकी से इस मामले पर वाराणसी के साथ ही लखनऊ के अफसर भी नजर रखे हुए थे इसलिए मामला मैनेज नहीं हो पाया।

    पकड़ी जाती हैं दवाएं, नहीं होती कार्रवाई

    एक साल पहले महरागजगंज में 638 करोड़ रुपये की दवाएं पकड़ी गई थीं। बाद में इसका अधिकतम खुदरा मूल्य 54 लाख रुपये बताया गया। लेकिन इसके बाद न तो दवाओं की जांच हुई और न ही ड्रग माफिया पर कार्रवाई। दवाओं के साथ पकड़े गए लोग जेल जरूर भेज दिए गए। महराजगंज में ही लगभग 10 दिन पहले 26 लाख रुपये की दवाएं पकड़ी गईं। इसमें भी तीन लोग जेल गए लेकिन ड्रग माफिया विभाग के चंगुल में नहीं आया। लगभग डेढ़ साल पहले गोरखपुर में लखनऊ से 38 लाख रुपये की दवाएं आई थीं।

    रातों रात गायब कर दी गईं दवाएं

    इसमें से 18 लाख रुपये की दवाएं मेडिकल स्टोरों तक भी पहुंच गईं। इसी बीच ड्रग विभाग को जानकारी हुई तो शेष दवाएं रात को ही भालोटिया मार्केट से गायब कर दी गईं। इस मामले में अलीनगर व घोष कंपनी पर दवा की दुकान में छापा पड़ा। दवाएं जब्त हुईं लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला दबा दिया गया। इतना ही नहीं पिछले साल भालोटिया में एक फर्म पर नारकोटिक्स ब्यूरो ने छापा मारा था। वहां से 25 हजार से अधिक कफ सिरप ऐसे मिले थे, जिनका बिल व्यापारी नहीं दिखा पाया था। बाद में यह मामला दबा दिया गया।

    लाइसेंस सरेंडर करने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी। गोरखपुर में पिछले साल जिन दुकानों से दवाएं जब्त की गई थीं, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। नशीली दवाओं के कारोबार में महराजगंज में कई लोग जेल जा चुके हैं। कार्रवाई अभी चल रही है। इस कार्य में संलिप्त कोई भी व्यक्ति कार्रवाई से बच नहीं पाएगा। - एजाज अहमद, औषधि आयुक्त।