BRD News: शरीर में कपड़ा लपेटकर मोड़ दिया रक्त प्रवाह, बच गई जान
गोरखपुर में, प्रसव के बाद रक्तस्राव से पीड़ित महिलाओं के लिए एंटी-शॉक गारमेंट एक जीवन रक्षक साबित हुआ है। बीआरडी ...और पढ़ें

प्रसव बाद रक्तस्राव रोकने में एंटी शाक गारमेंट का किया गया उपयोग
HighLights
एंटी-शॉक गारमेंट: जीवन रक्षक उपकरण
120 में से 96 महिलाओं की जान बची
रक्त प्रवाह मोड़कर रक्तस्राव रोका गया
गजाधर द्विवेदी, गाेरखपुर। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित प्रसूता की जान बचाने में दवाओं के साथ एक विशेष तरह की डिवाइस (एंटी शाक गारमेंट) बहुत ही कारकर साबित हुई है। शरीर के निचते हिस्सों में इस कपड़ेनुमा डिवाइस को लपेटकर डाॅक्टरों ने रक्त का प्रवाह ही मोड़ दिया। इससे गर्भाशय ग्रीवा से निकल रहा रक्त धीरे-धीरे बंद हो गया।
इस विधि से उपचार ने 120 में से 96 महिलाओं को नया जीवन दिया है। दवाओं के साथ एंटी शाक गारमेंट के उपयोग पर बीआरडी मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में अध्ययन किया गया। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि यदि दवाओं के साथ इस डिवाइस का उपयोग किया जाए तो प्रसव बाद अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित प्रसूता की आसानी से जान बचाई जा सकती है।
प्रोफेसर डा. वाणी आदित्य के निर्देशन में डा. अनामिका ने एक साल में प्रसव बाद अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित 120 महिलाओं पर अध्ययन किया। इन महिलाओं के शरीर के निचले हिस्से पर यह डिवाइस लपेटकर रक्त का प्रवाह हृदय, फेफड़ों व मस्तिष्क की ओर कर दिया गया। इससे दोहरा लाभ हुआ। गर्भाशय की तरफ आ रहे रक्त की दिशा बदल गई।
इससे धीरे-धीरे कर गर्भाशय ग्रीवा से निकलने वाला रक्त बंद हो गया। एक घंटे में कम हुआ। दूसरे घंटे में और कम हुआ और तीसरे घंटे में लगभग बंद हो गया। दूसरी तरफ इस रक्त ने हृदय, फेफड़ों व मस्तिष्क में पहुंचकर इन महत्वपूर्ण अंगों को ताकत प्रदान की, क्योंकि रक्त के साथ इन अंगों में आक्सीजन भी पहुंचा।
जो रक्त प्रसूता की जान ले सकता था, दिशा बदलने से उसी रक्त ने जीवन दे दिया। 120 में से 96 महिलाओं का रक्त एंटी शाक गारमेंट के उपयोग से पूरी तरह बंद हो गया। चार की मृत्यु हो गई। शेष 20 महिलाओं का रक्तस्राव भी कम हुआ था लेकिन पूरी तरह रोकने के लिए दूसरी विधियों का इस्तेमाल करना पड़ा।
प्रसव बाद अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में एंटी शाक गारमेंट ने बड़ी भूमिका निभाई है। इस डिवाइस की मदद से ऐसी प्रसूता की जान बचाई जा सकती है। इसका उपयोग अब ऐसी हर प्रसूता पर किया जा रहा है।
-डा. वाणी आदित्य, प्रोफेसर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कालेज
