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    लक्ष्य तो पूरा पर सरकार की मंशा अधूरी

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 14 May 2018 11:43 PM (IST)

    गोंडा: चौंकिए मत, यहां तो किसानों को ही मोहरा बना कर बिचौलिए किसानों को ठगने में लगे

    लक्ष्य तो पूरा पर सरकार की मंशा अधूरी

    गोंडा: चौंकिए मत, यहां तो किसानों को ही मोहरा बना कर बिचौलिए किसानों को ठगने में लगे हुए हैं। इन बिचौलियों को कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत उन्हें रास्ता दिखाने के साथ ही उनकी गलबहियों से सरकार की मंशा अधूरी रह जा रही है। बात हम सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की कर रहे हैं जहां अधिकांश किसान ठगी का शिकार हो रहे हैं। हां इतना जरूर है कि शासन द्वारा निर्धारित गेहूं खरीद का लक्ष्य भले ही पूरा हो रहा लेकिन सरकार की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

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    किसानों को उनकी उपज का लाभ मिल सके इसके लिए सरकार ने इस बार गेहूं खरीद के लिए नई व्यवस्था लागू की है। बिचौलिए से बचने के लिए किसानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के समय किसानों को पंजीकरण प्रपत्र के साथ जोत बही या खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र, बैंक पास बुक की छाया प्रति और यथा संभव आधार कार्ड ले जाने का नियम है। सरकार के इन झंझावतों से बचने के लिए किसान औने-पौने अपना गेहूं बिचौलिए के हाथ बेचने को विवश हो रहें हैं। यहां इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए किसान से बाजार भाव 1500 से लेकर 1600 रुपये प्रति ¨क्वटल गेहूं खरीद लेते हैं। इसके बाद अपने द्वारा तैयार किसान के कागजात के आधार पर सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेच देते हैं। ऐसे में करीब 200 रुपये प्रति ¨क्वटल के हिसाब से बचत हो जाती है। इस कार्रवाई से केंद्रों को आवंटित गेहूं खरीद का लक्ष्य भी पूरा हो जाता है और बिचौलिए व कर्मी की कमाई भी हो जाती है। भाजपा विधायक प्रेम नरायण पांडेय ने केंद्रों के निरीक्षण के दौरान ऐसी खामियां पकड़ भी चुके हैं। कुल मिलाकर किसान के साथ हो रही ठगी के पीछे बिचौलियों का साथ केंद्र पर तैनात कर्मी खूब दे रहें हैं। अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष 47 प्रतिशत 347700 ¨क्वटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। 15 जून तक जिले को 741000 ¨क्वटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है।

    जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजय विक्रम ¨सह ने बताया कि सभी केंद्र प्रभारियों को गाइड लाइन के अनुसार गेहूं खरीद के निर्देश दिए गए हैं। जहां कोई शिकायत मिलती है उसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा जाता है। उन्होंने बताया कुछ केंद्रों पर अनियमितता पाई गई थी जिसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।