अब नहीं सुनाई देती फूल के बर्तनों की खनखनाहट
गोंडा, आसमान छूती मंहगाई से अब फूल, तांबा व पीतल के बर्तनों की खनखनाहट नहीं सुनाई देती। अब सस्ते व टिकाऊ माने जाने वाले स्टील तथा चायनीज बर्तनों की बहार है।
दीपावली पर्व के दो दिन पूर्व धनतेरस के दिन वर्षो से लोग नए बर्तन व सामान खरीदते हैं। गत वषरें में दुकानदार से लेकर ग्राहक तक धनतेरस की तैयारी में जुट जाते थे। दुकानदार नई-नई डिजाइन के बर्तन और ग्राहक उसे खरीदने के लिए तैयारी करने लगते थे। लेकिन इस बार महंगाई की मार बाजारों में साफ झलक रही है। जो दुकानें पिछले वर्षाें में नए-नए बर्तनों से भर जाती थीं और दुकान के बाहर तक ग्राहकों को रिझाने के लिए बर्तन सजा दिए जाते थे, उनमें इस बार इतनी चहल-पहल व तैयारियां नहीं दिख रही हैं। इसके पीछे दुकानदारों का मानना है कि महंगाई से लोग अब केवल रस्म अदायगी तक सीमित रह गए हैं। पिछले वर्ष शुद्ध फूल के बर्तन जैसे फूलथाली अजमेरी 700 से 750 रुपये तक प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकती थी। आज उसका मूल्य 850 से लेकर 900 रुपये प्रतिकिलोग्राम हो गया है। गिलेट के बर्तन पिछले वर्ष 350 रुपये से 380 रुपये प्रति किलोग्राम थे, जो बढ़कर इस बार 430 रुपये से 450 रुपये तक प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। पीतल के दामों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इसका दाम 325 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 400 रुपये तक पहुंच गया है। तांबे के बर्तनों के मूल्य में 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी हुई है। स्टील के बर्तनों के मूल्य में भी करीब 40 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। स्टील का जो जग पिछले वर्ष तक 160 रुपये में बिकता था, उसका मूल्य अब 200 रुपये तक पहुंच गया है। थाली 125 रुपये से बढ़कर 200 रुपये तक पहुंच गई है। महंगाई का सबसे ज्यादा प्रभाव फूल व तांबे के बर्तनों पर पड़ा है। गत वर्षो तक जो लोग धनतेरस के दिन फूल के ही बर्तन खरीदते थे, वे भी रस्म अदायगी के लिए स्टील व चायनीज बर्तनों को पसंद कर रहे हैं। एक दुकानदार का कहना है कि पहले लोग फूल की थाली,लोटा व कटोरे की खरीददारी धनतेरस के दिन अधिक करते थे, लेकिन अब लोग जरूरत के मुताबिक स्टील के बर्तन खरीदते हैं। परंपरा निभाने व पूजा पाठ के लिए तांबे व फूल के छोटे बर्तनों की खरीददारी की जाती है। यही कारण है कि अब घरों से फूल की थाली, लोटा व गिलास,पीतल के थाल व परात तथा तांबे व फूल की पतीली गायब होती जा रही है। बर्तन व्यवसाई श्री राम सिंह कहते हैं कि मंहगाई का असर बाजार पर दिख रहा है। बावजूद इसके लोग बर्तनों की खरीददारी तो करते हैं लेकिन पहले की तरह नहीं। महंगाई ने फूल,ताबे व पीतल के बर्तनों का बाजार फीका कर दिया है। उनका मानना है कि अब स्टील के बर्तनों की मांग बढ़ी है। वहीं बर्तन व्यवसाई सतीश कुमार जैन कहते हैं कि अब लोगों की पसंद स्टील व चायनीज बर्तन बनते जा रहे हैं।
-धनंजय तिवारी
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