चीनी का कटोरा बना देवीपाटन मंडल
गोंडा,
पूर्वाचल में देवीपाटन मंडल ने चीनी का रिकार्ड उत्पादन कर चीनी का कटोरा साबित कर दिया है। पूर्वाचल के किसी भी मंडल में इतनी अधिक चीनी नहीं बनाई गई। इस बार 75 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है जो बीते दो वर्षो में 30 लाख क्विंटल अधिक है।
गोंडा से 351 लाख क्विंटल, बलरामपुर से 269 लाख क्विंटल तथा बहराइच से 177 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों को की गई। कुल 797 लाख क्विंटल गन्ने से यहां की चीनी मिलों ने 75 लाख क्विंटल चीनी का निर्माण किया। यहां तीन श्रेणियों में निर्मित होने वाली चीनी को देश के कोने-कोने में भेजी जाती है। हालांकि विदेश में निर्यात करने लायक चीनी यहां नहीं बनती है। यहां की मिलों में बनने वाली चीनी का प्रयोग कई मंडलों में की जाती है। बीते तीन वर्षो में आंकड़े तो यही कहते हैं कि यहां लगातार चीनी के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। पेराई सत्र 2012-13 में और अधिक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। कारण इस बार 20 प्रतिशत गन्ने का रकबा बढ़ गया है। वर्ष 2009-10 में 45 लाख क्विंटल, वर्ष 2010-11 में 55 लाख क्विंटल तथा वर्ष 2011-12 में 75 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ। मंडल में 11 चीनी मिलें हैं। इतनी अधिक मिलें पूर्वाचल के किसी भी मंडल में नहीं हैं। तुलसीपुर, बलरामपुर, इटईमैदा, मनकापुर, बभनान, मैजापुर, कुंदुरखी, चिलवरिया, पारले, आइपीएल की जरवलरोड तथा एक सहकारी चीनी मिल नानपारा संचालित हैं। तुलसीपुर ने छह लाख 90 हजार, बलरामपुर ने 13 लाख 73 हजार, इटईमैदा ने पांच लाख 54 हजार, मनकापुर ने आठ लाख 97 हजार, बभनान ने 10 लाख 16 हजार, मैजापुर ने तीन लाख 11 हजार, कुंदुरुखी ने 10 लाख 80 हजार, चिलवरिया ने छह लाख 14 हजार, नानपारा ने दो लाख 65 हजार, पारले ने चार लाख 85 हजार तथा आइपीएल जरवलरोड चीनी मिल ने एक लाख 91 हजार क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। ये उत्पादन के वे आंकड़े हैं जो गन्ने की रिकवरी प्रदर्शित कर विभाग को भेजी जाती है। ऐसा गन्ने के रिकार्ड उत्पादन व अच्छी रिकवरी के कारण संभव हुआ है। गन्ना उत्पादन में मंडल अव्वल रहा है। इस बार गन्ने का रकबा 20 प्रतिशत और बढ़ गया है जो अगले साल के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
सहायक चीनी आयुक्त पीके द्विवेदी का कहना है यह सही है कि देवी पाटन मंडल में चीनी का उत्पादन सबसे अधिक हुआ है।
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