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    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किनारे 1800 बीघा जमीन अधिग्रहित कर रही सरकार, पढ़ें कहां तक पहुंचा औद्योगिक गलियारे का काम

    Updated: Tue, 16 Jan 2024 11:56 PM (IST)

    Purvanchal Expressway Industrial Corridor पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किनारे 18 सौ बीघे में बनने वाले औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन बैनामे की रफ्तार काफी धीमी है। यदि यहीं रफ्तार रही तो पूरी जमीन का बैनामा कराने में कई माह का समय लगेगा। सरकार ने हैदरिया से लखनऊ जाने वाले 340 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे की घोषणा की थी।

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    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किनारे 1800 बीघा जमीन अधिग्रहित कर रही सरकार, पढ़ें कहां तक पहुंचा औद्योगिक गलियारे का काम

    जागरण संंवाददाता, गाजीपुर। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किनारे 18 सौ बीघे में बनने वाले औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन बैनामे की रफ्तार काफी धीमी है। पिछले 12 दिनों से सिर्फ 16 बैनामे हुए हैं। हालांकि इसमें करीब डेढ़ करोड़ का स्टांप लगा है। यहीं रफ्तार रही तो पूरी जमीन का बैनामा कराने में कई माह का समय लगेगा।

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    सरकार ने हैदरिया से लखनऊ जाने वाले 340 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे की घोषणा की थी। इसके लिए जिला प्रशासन ने प्रथम चरण में हैदरिया के समीप एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर पर 18 सौ बीघा जमीन अधिग्रहित किया है।

    यूपीडा (औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के नाम चार जनवरी से इसका बैनामा शुरू हो गया है। यह बैनामा मुहम्मदाबाद तहसील में चल रहा है।तहसीलदार व नायब तहसीलदार के माध्यम से यूपीडा के नाम पर किसानों की जमीन की रजिस्ट्री करायी जा रही है। चार जनवरी से बैनामा शुरू है। अब तक 16 बैनामे कराए गए हैं। दरअसल, इस बैनामे में ई स्टांप का प्रयोग किया जा रहा है।

    स्टांप का पैसा बैंक में जमा करने आदि की प्रक्रिया में देर रही है। स्टांप निकासी में तहसील प्रशासन को नकद धनराशि जमा करनी पड़ रही है, जिसमें समय लगने के कारण बैनामा कम हो पा रहा है। अभी तक इन बैनामों में करीब डेढ़ करोड़ का स्टांप लगा है।

    परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेगा लोकनिर्माण व जलनिगम

    औद्योगिक गलियारे में आने वाली परिसंपत्तियों ट्यूबवेल, भवन व अन्य का मूल्यांकन लोकनिर्माण विभाग व जलनिगम के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ राजस्व अधिकारी (सीआरओ) आशीष कुमार मिश्रा ने दोनों विभागों को निर्देशित किया है कि टीम परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करे।

    गलियारे में काफी संख्या में किसानों की परसंपत्तियां आ रही हैं, जिनका मुआवजा अभी तय नहीं हुआ है। जिला प्रशासन ने जमीन का रेट तो तय कर लिया है।

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