मुहम्मदाबाद (गाजीपुर) : मां कष्टहरणी भवानी के मंदिर में नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। लोगों का विश्वास है कि मां की अपने भक्तों पर दयादृष्टि हमेशा बनी रहती है। मान्यता के अनुसार यह स्थान पहले दारुकवन के नाम से प्रसिद्ध था। वानप्रस्थ के समय द्रौपदी संग महाराज युधिष्ठिर, उनके सभी भाई एवं कुल पुरोहित धौम्य ऋषि के साथ आए थे। यहां उन्होंने मां की पूजा-आराधना की। मां ने उनकी मनोकामना को पूर्ण किया। मंदिर के पुजारी हरिद्वार पांडेय के अनुसार त्रेता युग में राम-लक्ष्मण अपने गुरु विश्वामित्र के साथ बक्सर जाते समय यहां कुछ देर विश्राम किए थे। मां की पूजा अर्चना कर बक्सर जाकर चरित्तर वन में महाराक्षसी ताड़का का वध किया। लगभग 400 वर्ष पूर्व अघोरेश्वर भगवान कीनाराम को मां ने स्वयं अपना प्रसाद प्रदान कर पहली सिद्धी से परिपूर्ण किया। नवरात्र में रात और दिन महिला श्रद्धालु मां की दरबार में शरणागत रहकर अखंड दीप जलती है। वहीं रात्रि में भजन कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय रखती है। मां के मंदिर में नवरात्र के प्रथम दिन मंगलवार को हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और अपनी मुरादें पूरी करने के लिए मनौती मांगी। मंदिर परिसर में अखंड दीप जलाने वाली महिलाओं से पूरा मंदिर पटा रहा।

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