World No-Tobacco Day: 50-100 रुपये का जुर्माना लगाने तक सिमटा अभियान, मोहल्लों में धड़ल्ले से खुले नशा-मुक्ति केंद्र
गाजियाबाद में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है जिससे मुंह के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। जागरूकता अभियान कमजोर पड़ने से स्थिति गंभीर हो रही है। सार्वजनिक स्थानों पर चालान किए जा रहे हैं लेकिन नशा मुक्ति केंद्रों में भी अनियमितताएं हैं। युवाओं में तंबाकू के कारण कैंसर का खतरा बढ़ रहा है जिसके प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले में तम्बाकू सेवन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। टीबी मरीजों में अधिकांश तम्बाकू सेवन करने वाले लोग शामिल हैं।
मुंह का कैंसर भी सबसे अधिक तंबाकू सेवन करने से हो रहा है। इसके बाद भी तम्बाकू निषेध को लेकर संचालित जागरूकता अभियान कमजोर पड़ा हुआ है।
आलम यह है कि पचास और सौ रुपये का जुर्माना लगाने तक यह अभियान सिमट गया है।एनसीडी विंग में चल रहे क्लीनिक पर भी कोई सलाह नहीं दी जा रही है।
अस्पतालों की ओपीडी ही नहीं वार्ड तक में मरीज बीडी पीते रहते हैं और तम्बाकू खाते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक स्थानों एवं स्कूलों के आसपास तम्बाकू बेचने पर वर्ष 2023-24 में 118 लोगों का चालान करते हुए 14 हजार रुपये का और वर्ष 2024-25 में 379 लोगों का चालान करते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
53 नशा केंद्रों में दो हजार से ज्यादा मरीज भर्ती
जिला सर्विलांस अधिकारी आरके गुप्ता के अनुसार जिले में संचालित 53 नशा मुक्ति केंद्रों में दो हजार से अधिक मरीज भर्ती है। अधिकांश केंद्रों के पास लाइसेंस भी नहीं है।
सूत्रों के अनुसार कुछ नशा मुक्ति केंद्रों में ड्रग्स की बिक्री की जा रही है। महिला नशा मुक्ति केंद्रों की मांग बढ़ने लगी है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषि गुप्ता के अनुसार पिछले वर्ष में दो हजार से अधिक मुंह के कैंसर के रोगियों का उपचार किया गया है। अधिकांश कैंसर का मुख्य कारण तम्बाकू सेवन एवं धूम्रपान ही पाया गया है।
गाजियाबाद में दिन प्रतिदिन कैसर के मरीज बढ़ते जा रहे है। इसका मुख्य कारण धूम्रपान करना, बीड़ी, तम्बाकू, पान मसाले का प्रयोग करना है। शहर में रोजाना 200 से 150 के बीच कैंसर के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
50 फीसदी कैंसर के मरीज मुंह और गले के कैंसर के होते हैं
इसमें से 50 फीसदी मरीज मुंह और गले के कैंसर के होते हैं। इसमें सबसे अधिक युवा 19 वर्ष से 35 साल के हैं। डा.संतराम वर्मा का कहना है कि बीड़ी, सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पादों का निरंतर उपयोग युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।
तंबाकू सेवन का सबसे पहले असर मुंह, गले और फेफड़ों पर पड़ता है। मुंह के कैंसर के मामले अधिक इसलिए भी होते हैं क्योंकि लोग गुटखा और तंबाकू को लंबे समय तक मुंह में रखे रहते हैं। यह धीरे-धीरे कैंसर की वजह बनता है।
तंबाकू और धूम्रपान छोड़ने के 20 साल तक कैंसर का खतरा बना रहता है। एल्कोहल के साथ धूमपान करता है तो कैंसर की संभावना 90 प्रतिशत बढ़ जाती है। धूम्रपान करने से मुधमेह, हाइपरटेंशन, दिल और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान करने से फेफड़े, मुंह, आहार नली, नाक, पेट, यकृत, गुर्दे, यूरिन ब्लेडर के कैंसर का भी खतरा रहता है। इसलिए समय रहते चेतने की जरूरत है।
मुंह के कैंसर के लक्षण
- मुंह में घाव होने पर लंबे समय तक नहीं भरना
- दांत हिलने लगना
- सांस लेने में कठिनाई होना
- गले में गाठ बन जाना
- मुंह से खून आना
- खाना निगलने में दिक्कत होना
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