गाजियाबाद/साहिबाबाद [हसीन शाह]। कोरोना की दूसरी लहर में एक महिला के परिवार को उजाड़ दिया था। सास, ससुर और पति की मौत के बाद महिला ने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। महिला ने पति की मौत से पहले इंदिरापुरम स्थित निजी आइवीएफ सेंटर पर सरोगेसी कराई थी। 

सरोगेसी से मां बनने के लिए डाक्टर से जाहिर की इच्छा

कोरोना की दूसरी लहर में सरकार ने कई तरह की पाबंदियां लगा दी थी। कोरोना संक्रमण दर कम होने पर पाबंदियों में ढील दी गई। इसके बाद गोविंदपुरम में रहने वाली महिला और उसका पति इंदिरापुरम स्थित गुंजन आइवीएफ सेंटर पहुंचे। डाक्टर से सरोगेसी से मां बनने के लिए इच्छा जाहिर की। डाक्टर ने संबंधित चेकअप करने के बाद सरोगेसी से मां बनने के लिए मेडिकल प्रक्रिया पूरी कर दी।

कोरोना की दूसरी लहर में पति, सास व ससुर की हो गई थी मौत

कुछ दिन बाद अचानक सास व ससुर को बुखार आ गया। उन्हें नेहरू नगर के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई। सास व ससुर का आक्सीजन स्तर कम होने से उनकी जान चली गई।

इस दौरान पति भी कोरोना संक्रमित हो गया। तभी आइवीएफ सेंटर की डा. गुंजन ने फोन कर बताया कि उनकी सरोगेसी सफल हो गई है। इसके बाद पति को बहुत खुशी हुई लेकिन कोरोना ने पति की भी जान ले ली।

बच्चे से मिली मुस्कान

काफी दिन तक महिला ने किसी से बात नहीं की। वह गुमसुम रहती थी। नौ माह बाद सरोगेसी महिला मां बनी तो उनके चेहरे को नई मुस्कान मिल गई। महिला का पति मेडिकल स्टोर चलाते थे। अब महिला एक फार्मासिस्ट की मदद से इस स्टोर को चला रही है और बेटे की परवरिश कर रही है। महिला का कहना है कि वह अपने बेटे को डाक्टर बनाएगी।

क्या है सरोगेसी कानून

नया कानून व्यवसायिक सरोगेसी को रोकता है। जनवरी 2022 में राष्ट्रपति ने इस एक्ट पर मुहर लगाई थी। इस कानून के तहत मदद के लिए सरोगेसी की अनुमति दी गई है। कानून के तहत सरोगेट मां का 36 माह का इंश्योरेंस व उसका मेडिकल खर्च दंपति को उठाना होगा। सरोगेट मां को भुगतान नहीं किया जाएगा।

क्या है सरोगेसी

डाक्टर गुंजन ने बताया कि सरोगेसी मेडिकल प्रोसेस है। इसमें दंपति किराए पर कोख लेते हैं। किराए पर कोख देने वाली महिला सरोगेट मां कहलाती है। दंपति के शुक्राणु व अंडाणु से लैब में मेडिकल प्रोसेस से भ्रूण तैयार होता है और सरोगेट की कोख में पहुंचा दिया जाता है।

Edited By: Abhishek Tiwari