VIDEO: गाजियाबाद की कोर्ट में तेंदुए के हमले से घायल हुए लोगों की आपबीती, बस बच गई जान... छूकर गुजरी मौत
Ghaziabad Leopard Attack गाजियाबाद की जिला अदालत में शाम करीब 4.05 मिनट पर अचानक आवाज आई तेंदुआ-तेंदुआ। न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों ने नजर घुमाई तो देखा सामने तेंदुआ गुर्रा रहा था। इसके बाद परिसर में भगदड़ मच गई। (Photo- Jagran)

गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। Ghaziabad Leopard Attack: न्यायालय परिसर में शाम के समय शोर मचा कि तेंदुआ आ गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट रूम से लेकर अधिवक्ताओं के चैंबर गेट और शटर बंद होते चले गए। मुकदमों में तारीख पर आए लोगों के अलावा अधिवक्ता और न्यायालय की सुरक्षा में तैनात आरक्षी बाहर रह गए। बदहवास हालत में इधर-उधर भागने लगे। कुछ ने खुद को शौचालय में घुसकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
तेंदुए के सामने जो भी आया वह उन पर झपटकर पंजे और दांतों से हमला कर बुरी तरह जख्मी कर दिया। इनमें जमानत कराकर लौट रहे तीन सगे भाई, बेटे की जमानत के लिए आई एक वृद्धा, मुकदमे में तारीख पर आए आरोपित, पूर्व एडीजीसी और सुरक्षा गार्द में तैनात आरीक्षी को घायल किया।
आरक्षी विकास कुमार ने बताया कि कोर्ट संख्या 35 पर तैनाती है। शाम के समय कोर्ट चल रही थी और मैं सुरक्षा में बाहर तैनात था। एक शोर मचा और मैं कुछ समझ पाता तो देखा कि ऊपर कोर्ट संख्या 50 के जीने से तेंदुआ तेजी के साथ आया और पहले पंजे से झपट्टा मारा और हाथ में दांत गड़ाकर बुरी तरह घायल कर दिया। मैंने हाथ-पांव चलाए और शोर मचने पर वह आगे भाग गया। मुझे लग रहा था कि नहीं बच सकूंगा।
हमले में घायलों की आपबीती-
पूर्व एडीजीसी प्रमोद कुमार ने बताया कि एक मुकदमें में सुनवाई के बाद करीब चार बजे न्यायालय से अपने चैंबर के लिए निकल रहा था। तभी देखा कि शोर मच रहा है और सामने ही एक तेंदुआ किसी अधिवक्ता पर हमला कर रहा है। उन्हें बचाने के लिए मैंने वहां पास में ही पड़ा एक डंड़ा उसे मारने का प्रयास किया। इस पर तेंदुए ने मुझ पर हमला कर दिया। चेहरे और हाथ पर पंजे और दांतों से हमला कर न्यायालय परिसर में भाग गया। मुझे साथी अधिवक्ता चंद्रकांत लेकर अस्पताल लाए।
घायल अशरफ अहमद ने कहा कि झगड़े के मामले में कोर्ट संख्या 30 में एक मुकदमा चल रहा था। आज जमानत के बाद अपने भाइयों के साथ न्यायालय से बाहर निकला था कि शोर मचने लगा। हम तीनों भाई एक शौचालय में जाकर अंदर से गेट बंद कर लिया। इसके बाद आवाज आना बंद हुई तो दरवाजा खोलकर देखा तो तेंदुए ने हमला कर दिया। मुझे हाथ और गर्दन पर बुरी तरह काटा है। इसके बाद किसी तरह इधर-उधर भागकर जान बचाई।
घायल जईम अहमद ने कहा कि भाई की जमानत के बाद घर लौट रहे थे तभी शोर मच गया कि बंदर ने हमला कर दिया। इसके बाद हम तीनों भाइयों ने भागकर शौचालय में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक हम अंदर बंद रहे और फिर जैसे ही हल्के से दरवाजा खोलकर बाहर देखना चाहा तो वहीं, मौजूद तेंदुए ने तेज धक्के के साथ हम पर हमला कर दिया। इसमें मेरे अलावा छोटे भाई अशरफ और तनवीर भी जख्मी हो गए।
घायल तनवीर अहमद ने कहा कि हम तीनों भाई हमले से बचने के लिए शौचालय में अंदर से बंद थे। बड़े भाई जईम अहमद ने दरवाजा खोला तो तेंदुए ने सबसे पहले मुझ पर हमला किया। इसके बाद हम शोर मचाते हुए बाहर भागे तो दोनों भाइयों को भी काटकर और पंजे से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। इसके बाद शोर-शराबे के बीच वह न्यायालय परिसर में ही आगे की ओर भाग गया। हम वहां से बाहर निकले और जख्मी हालत में हमें अस्पताल लाया गया।
घायल रामावती ने बताया कि मैं अपने बेटे की जमानत के लिए पिछले पांच दिनों से लोनी के राम पार्क से आ रही हूं। आज बेटे की जमानत हो जाएगी इसी आस में कोर्ट की चौखट पर बैठी थी। मुझे कुछ पता ही नहीं चला कि कब तेंदुआ आया। मैं कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसने मेरे हाथ पर दांत गड़ा दिए। पंजे से दूसरे हाथ पर हमला किया। लोगों ने शोर मचाया और किसी तरह मेरी जान बची।
घायल नमन जैन ने बताया कि कोर्ट संख्या 21 में एक मुकदमे की तारीख के बाद बाहर निकल रहा था। इसी बीच जीने से उतरते हुए पीछे से तेंदुए ने हमला कर दिया। हाथ और कंधे पर बुरी तरह से काटा और पंजे से हमला किया। मैंने शोर मचाते हुए जैसे तैसे बचने की कोशिश की। इस बीच अन्य लोगों के शोर मचाने के बाद वह मुझे छोड़कर भाग गया। मेरा मोबाइल भी वहीं छूट गिर गया।
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