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    Ghaziabad News: फर्जीवाड़ा कर 5 साल में कराईं 20 हजार शादी, एसआईटी जांच में हुआ पर्दाफाश

    गाजियाबाद में पांच आर्य समाज मंदिर ट्रस्टों पर फर्जीवाड़ा कर शादियां कराने का आरोप है। एसआईटी जांच में सामने आया है कि बिना मान्यता के इन मंदिरों ने पांच साल में करीब 20 हजार शादियां कराईं और उनके प्रमाण पत्र जारी कर दिए। पुलिस ने 20 से ज्यादा लोगों को आरोपित बनाया है और शीघ्र ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी।

    By vinit Edited By: Abhishek Tiwari Updated: Thu, 23 Jan 2025 08:55 AM (IST)
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    गाजियाबाद में फर्जीवाड़ा कर शादियां कराने पर खुलासा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    विनीत कुमार, गाजियाबाद। अक्टूबर में पुलिस ने शहर में पांच आर्य समाज मंदिर ट्रस्ट की मौके पर जांच कर एफआईआर दर्ज की थी। इन सभी मामलों के लिए गठित एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

    जांच में सामने आया कि बिना मान्यता इनके संचालकों ने पांच साल में करीब 20 हजार शादियां कराईं और उनके प्रमाण पत्र जारी कर दिए। कुछ लोग ऐसे हैं जो कई शादियों में गवाह बने हैं।

    20 से ज्यादा आरोपितों पर दाखिल होगी चार्जशीट

    पुलिस का मानना है कि ऐसे लोग दलाल हैं जो कागजों में फर्जीवाड़ा कर शादियां कराने में भूमिका निभाते हैं। पुलिस शीघ्र ही इन पांचों मामलों में कोर्ट में 20 से ज्यादा आरोपितों पर चार्जशीट दाखिल करेगी।

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    घर से भागे प्रेमी युगल करते हैं मंदिर में शादी

    घर से भागकर प्रेमी युगल के लिए आर्य समाज मंदिर में शादी करने का चलन सबसे ज्यादा है। मंदिर में शादी कर युगल अपनी शादी का पंजीकरण कराकर उसे कानूनी जामा पहना लेते हैं। इसके बाद जरूरत पड़ने पर कई जोड़े सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेते हैं, लेकिन घर से भागने वाले सभी प्रेमी युगल बालिग नहीं होते।

    यहीं दलालों और फर्जी शादी कराने वालों की भूमिका और धंधा दोनों शुरू हो जाते हैं। लड़का या लड़की नाबालिग होने पर दलाल फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और फर्जी आधार तैयार कराते हैं और आर्य समाज मंदिर में शादी करा लेते हैं। कुछ मामलों में शादी को रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत भी करा देते हैं।

    कई गवाहों के आधार कार्ड मिले फर्जी

    पुलिस की जांच में सामने आया है कि पांच हजार रुपये से 20 हजार रुपये तक आरोपितों ने शादियों के नाम पर लिए हैं। पुलिस की जांच में कई गवाहों के आधार कार्ड फर्जी पाए गए।

    जिन गवाहों के आधार फर्जी पाए गए पुलिस उन्हीं गवाहों को दलाल मान रहीं है। जांच में कुछ दलाल चिन्हित भी हुए हैं। चार्जशीट में उनके नाम भी शामिल किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसी शादी कराने वाले लड़के और लड़की के माता-पिता को भी सूचना नहीं देते।

    तीन शादियों में एक ही गवाह पाया गया

    नंदग्राम स्थित आर्य समाज मंदिर ब्रजनगरी के प्रबंधकों पर पुलिस ने 17 अक्टूबर को नंदग्राम थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने 30 नवंबर को जयकरन और ब्रजेश शास्त्री को गिरफ्तार किया था।

    कोर्ट में पुलिस ने जयकरन के मामले में केस डायरी भी पेश करते हुए जानकारी दी थी कि विवाह संबंधी प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच विवाह पंजीकरण कार्यालय उपनिबंधक सदर तहसील गाजियाबाद के यहां जाकर की गयी तो केवल तीन विवाह दिनांक 14 दिसंबर 2020 को पंजीकृत कराया जाना पाया गया। जिसमें गवाह विजय का आधार कार्ड फर्जी होना पाया जाना बताया गया है। कोर्ट से आरोपितों को 24 दिसंबर को जमानत मिल गई थी।

    शासन से ऐसे केंद्रों की जांच के बाद दर्ज हुई थीं पांच FIR

    बिना मान्यता शादी का सर्टिफिकेट जारी करने वाले आर्य समाज मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन पर पुलिस ने बीते वर्ष 17 अक्टूबर को मुकदमे दर्ज किए थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से ऐसे केंद्रों की जांच के आदेश आए थे। जांच में पांच केंद्र संचालक लखनऊ मुख्यालय से मान्यता नहीं दिखा पाए।

    पुलिस ने कविनगर के ब्लाक स्थित आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट, कोतवाली क्षेत्र स्थित आर्य समाज मंदिर माडल टाउन ट्रस्ट एवं आर्य समाज वैदिक संस्कार मंदिर माडल टाउन, वैदिक समाज कल्याण समिति सेक्टर-नौ विजय नगर और आर्य समाज मंदिर बृजनगरी नंदग्राम प्रबंधन पर केस दर्ज किए थे। 

    पहले भी दर्ज हुए फर्जीवाड़ा कर शादी कराने के मामले

    दिसंबर 2020 में कविनगर थाने में आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट पर मुस्लिम युवक और हिंदू युवती की शादी कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

    आरोप लगाया गया कि राजस्थान के नागौर निवासी शोएब अख्तर की एक हिंदू युवती से शादी कराई गई और फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। एक अन्य मामले में कविनगर स्थित आर्य समाज मंदिर में कराई गई शादी पर वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सवाल खड़े किए थे।