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    बच्चों की ट्यूशन टीचर से दुष्कर्म के आरोप में पिता ने काटी जेल, कुछ सबित न कर सकी तो कोर्ट से आरोपी बरी

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:21 PM (IST)

    गाजियाबाद में एक शिक्षिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा। पीड़िता ने कोर्ट में आरोपी को अपना बॉयफ्रेंड बताया और उसके साथ क्लबों में जाने की बात स्वीकार की। बचाव पक्ष ने पीड़िता के बयानों में विरोधाभास होने की दलील दी। कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।

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    कोर्ट में साबित नहीं हो सके आरोप, जिस पर आरोपी को बरी कर दिया गया।

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। दिल्ली विश्विद्यालय से एम, बीएड करने वाली हाई प्रोफाइल स्कूल की 40 वर्षीय शिक्षिका का अपहरण, दुष्कर्म और और मोबाइल लूटने के आरोपित को कोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं करा सका।

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    पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी को अपना बायफ्रेंड और उसके साथ क्लबों में जाना स्वीकार किया। पीड़िता द्वारा साहिबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था। वह चार माह तक जेल में रहा।

    साहिबाबाद थाना क्षेत्र निवासी 40 वर्षीय महिला निजी स्कूल में शिक्षिका है। महिला की मुलाकात बच्चों को पढ़ाने को लेकर अप्रैल 2018 में एक व्यक्ति से हुई। इसके बाद दोनों का मिलना-जुलना शुरू हो गया। फोन पर बात होने लगी।

    महिला ने 20 जनवरी 2020 को साहिबाबाद थाने में व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी उसका रोज पीछा करता है। फोन कर बार-बार बुलाता है। उसके बच्चे का अपहरण करने और तेजाब फेंकने की धमकी देता है।

    जनवरी 2018 जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर मारपीट की। उससे पैसे की मांग की गई। उसका मोबाइल छीन लिया। जब वह स्कूल में बच्चे पढ़ाने जाती है तो रास्ते में उसे रोक कर ब्लैकमेल करता है। उसे जबरन शराब पिलाता है।

    वीडियो प्रसारित करने की धमकी देता था। इससे उनका परिवार सदमे हैं। साहिबाबाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।

    बचाव पक्ष के अधिवक्ता नसीम चौधरी ने कोर्ट में कहा कि पीड़िता 40 वर्षीय शादीशुदा महिला। उसके बेटे की उम्र 17 वर्ष है। कोर्ट में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की जिरह हुई। कोर्ट में कहा गया कि पीड़िता और विवेचक के बयानों में विरोधाभास है।

    पीड़िता ने आरोपित के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है। कोई मेडिकल साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था लेकिन पुलिस ने आरोपी के पास से छीना हुआ मोबाइल बरामद नहीं किया। आरोपी भी शादीशुदा है। उसके दो बच्चे हैं।

    जिन्हें महिला ट्यूशन पढ़ाती थी। आरोपित के साथ पीड़िता के फोटो देखने पर लगा रहा है कि पीड़िता सहमति से फोटो खिंचवा रही है।

    ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे साबित हो सके कि पीड़िता के साथ आरोपित ने दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और धमकी दी। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपित को बरी कर दिया।

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