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    डीएम सर्किल रेट के आधार पर अब नहीं बढ़ेगा संपत्ति कर, नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव गिरा

    Updated: Mon, 30 Jun 2025 06:35 PM (IST)

    गाजियाबाद नगर निगम बोर्ड ने डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर वसूलने का प्रस्ताव रद्द कर दिया है जिससे छह लाख से अधिक करदाताओं को राहत मिली है। लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद यह फैसला लिया गया। महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि अब पुरानी दर से ही टैक्स लगेगा और छूटी हुई संपत्तियों को कर के दायरे में लाया जाएगा।

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    बढ़ा हुआ संपत्ति कर वसूलने का प्रस्ताव निगम की बोर्ड बैठक में निरस्त हो गया।

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर वसूलने का प्रस्ताव सोमवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में निरस्त कर दिया गया।

    इस निर्णय से शहर के छह लाख से ज्यादा करदाताओं को बेवजह के आर्थिक बोझ से राहत मिली है। नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से संपत्ति कर बढ़ाने के विरोध में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।

    निगम की बोर्ड बैठक में पदेन सदस्य भाजपा सांसद अतुल गर्ग, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी व शहर विधायक संजीव शर्मा भी मौजूद रहे।

    भाजपा नेता राजेंद्र त्यागी ने उठाया था मामला

    इस मुद्दे को सबसे पहले पूर्व पार्षद व वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र त्यागी ने उठाया था। उन्होंने मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर रखी है।

    नगर निगम मुख्यालय में बोर्ड बैठक महापौर सुनीता दयाल की अध्यक्षता में सोमवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। बैठक में 100 में से 88 पार्षद मौजूद रहे।

    डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर वसूलने पर चर्चा के दौरान सभी पार्षदों ने एक सुर में विरोध किया। पार्षदों ने कहा कि निगम के निर्णय से जनता परेशान हैं। लोगों पर आर्थिक बोझ डाला गया है।

    पदेन सदस्यों ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जो संपत्तियां कर के दायरे से छूटी हुई हैं। उन्हें कर के दायरे में लाकर निगम के राजस्व में बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    महापौर बोलीं- दो महीने में हर छूटी संपत्ति टैक्स के दायरे में आएगी

    इसके बाद महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि वह भी संपत्ति कर बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। लिहाजा सदन के निर्णय के अनुसार डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर बढ़ाने का प्रस्ताव निरस्त किया जाता है।

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    महापौर ने कहा कि दो महीने में शहर की सभी संपत्ति की जांच की जाएगी और हर छूटी संपत्ति को टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। माल समेत हर बड़ी संपत्ति की जांच होगी।

    जिन्होंने नया टैक्स जमा किया है, एडजस्ट किया जाएगा

    अब पुरानी दर से ही संपत्ति पर टैक्स लगेगा, जो लोग हाउस टैक्स जमा कर चुके हैं उनका पैसा अगले बिल में समायोजित होगा।

    उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने दो और तीन मंजिल मकान बना लिए लेकिन वह केवल एक मंजिल का ही टैक्स दे रहे हैं। अब जितनी मंजिल होंगी उतना ही टैक्स लगेगा। टैक्स लगने के बाद पार्षद सिफारिश करने आते हैं। पार्षदों से अनुरोध हैं कि वह टैक्स पर सिफारिश न करें।

    पुरानी दर से ही टैक्स लगना चाहिए। टैक्स में जो विसंगति है उनमें सुधार होना चाहिए। सभी की जिम्मेदारी तय की जाए। पुरानी दर से ही टैक्स लगना चाहिए। पार्षदों को अपनी आवाज उठाने का हक है। पार्षदों पर दबाव न डाला जाए।

    - सुनील शर्मा, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार

    जनता की मांग सर्वोपरि है। लोगों के पास टैक्स के ज्यादा बिल आ रहे हैं। कृषि कानून अच्छा बिल था, लेकिन किसानों के आंदोलन को देखते हुए सरकार को वह बिल वापस लेना पड़ा। महापौर और सदन जनता के हित को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    - संजीव शर्मा, शहर विधायक

    सदन का निर्णय सबसे ऊपर है। सदन की कार्रवाई के बारे में शासन व हाई कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।

    -विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त