Ghaziabad: बार-बार तेंदुए की दस्तक का होगा अध्ययन, भारतीय वन विभाग के विशेषज्ञों को बुलाने की तैयारी तेज
तेंदुए की दस्तक को लेकर अध्ययन की तैयारी तेज हो रही है। गाजियाबाद समेत दिल्ली-एनसीआर में आए दिन तेंदुए की दस्तक को लेकर भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों से अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों को बुलाकर अध्ययन और सर्वे कराने की तैयारी की जा रही है।

गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। गाजियाबाद समेत दिल्ली-एनसीआर में आए दिन तेंदुए की दस्तक को लेकर भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों से अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों को बुलाकर अध्ययन और सर्वे कराने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेंदुए की बढ़ती सक्रियता को रोकने के लिए विशेष योजना बनाने की भी तैयारी है।
एनवायरमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन के संयोजक और पर्यावरणविद डॉ. जितेंद्र नागर ने इसके लिए वन विभाग को पत्र लिखा है। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक मनीष सिंह ने इस पत्र के मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि आबादी के बीच बार-बार तेंदुए की दस्तक को लेकर वन विभाग भी चिंतित है। आने के रास्ते, कारण, छिपने के ठिकाने, छिपने के दौरान भूख मिटाने का तरीका, स्थानीय स्तर पर तेंदुए पैदा होने जैसे अहम बिंदुओं को लेकर सर्वे के साथ-साथ अध्ययन होगा। वन विभाग जल्द ही इस संबंध में पत्र भेजकर विशेषज्ञों को आमंत्रित करने जा रहा है।
सोमवार से होगी कॉम्बिंग
वन विभाग की टीम सोमवार से शहर के तीन स्थानों पर तेंदुए की आशंका को लेकर कॉम्बिंग करने जा रहीं हैं। पुलिस, प्रशासन एवं न्यायिक अधिकारियों से वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया है। एएलटीटीसी और इंग्राहम इंस्टीटयूट परिसर के घने जंगलों में तेंदुए के छिपे होने की आशंका के चलते 10 दिन तक कॉम्बिंग की जाएगी। इसके बाद वायु सेना स्टेशन हिंडन परिसर में भी कॉम्बिंग की योजना है।
किसानों को जागरूक करने की तैयारी
खेत में काम करने वाले किसानों को इस संबंध जागरूक एवं प्रशिक्षित किया जाएगा। वन विभाग का मानना है कि तेंदुए के शहर में आने का अहम स्रोत खेत हैं। खेतों में तेदुए के दिखाई देने अथवा पंजों के निशान दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दिया जाना बड़ी बात है। आमतौर पर किसान देखकर भाग जाते हैं और इसकी सूचना देने से कतराते हैं।
वन्य जीव सर्वे की रिपोर्ट
वर्ष 2019 में जिले में 495 माेर, 18,614 बंदर और 1,206 लंगूर थे, जो वर्ष 2022 में घटकर क्रमश: 270, 1075 और 144 रह गए हैं। विभाग का मानना है कि कृषि योग्य जमीनों पर आवासीय भवन बनने और खेत-खलिहान, बाग व जंगल कम होने से वन्य जीव कम हो रहे हैं। वर्तमान में जिले में 697.86 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। अगले पांच साल में इसे बढ़ाकर 702.164 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
नौ तेंदुए पाए गए
शहरी और देहात क्षेत्रों में विगत तीन साल में नौ तेंदुए दिखाई दिये। सर्वे में इनका विवरण दर्ज किया गया है। इनमें से एक तेंदुए की डीएमई पर सड़क हादसे में मौत हो गई। राजनगर, डासना, रईसपुर, मोदीनगर, करहैडा और साहिबाबाद क्षेत्र में भी तेंदुए दिखाई दिये। दो लकडबघा, 17 लोमड़ी और 57 फिशिंग कैट भी सर्वे में पाई गईं हैं।
जानें शहर में कब-कब दिखाई दिए तेंदुए
- 8 फरवरी 2023: कोर्ट में पांच घंटे तक रहकर तेंदुए ने 10 लोगों को किया घायल। बाद में पकड़ा गया।
- 17 जनवरी 2023 : भोजपुर थाना क्षेत्र के कलछीना के पास सड़क हादसे में तीन साल के तेंदुए की मौत
- 10 अक्टूबर 2022 : राजनगर के सेक्टर-13 में सर्विस रोड़ पर जाते हुए दिखा तेंदुआ
- 13 नवंबर 2021 : कविनगर के राजनगर सेक्टर 10 में साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा के आवास के बाहर व सेक्टर 11 में दिखा छोटा तेंदुआ
- 14 नवंबर 2021 : मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के बापूधाम व रईसपुर के पास दिखा था छोटा तेंदुआ, लोग हुए थे घरों में कैद
- 20 नवंबर 2021: डासना में वन विभाग के कर्मचारी सुनील व चरनसिंह पर तेंदुए ने किया था हमला
- 24 नवंबर 2020 : राजकुंज में दिखा। इंग्राहम परिसर की तरफ से जीडीए वीसी के आवास पर पहुंचा था। कई दिन चला था सर्च आपरेशन
- 4 दिसंबर 2020 : मुरादनगर में गंगनहर के पास मिले थे तेंदुए के पैरों के निशान, कई दिन तक क्षेत्र में रहा था दहशत का माहौल
मामले को लेकर क्या कहते हैं जानकार?
वन्य जीव संरक्षण के साथ इंसानों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। घटते वन क्षेत्र की वजह से तेंदुए बार-बार शहर के पॉश इलाकों में आ रहे हैं। कोर्ट जैसी सुरक्षित जगह पर तेंदुए का पहुंचना चिंतन और अध्ययन का विषय है। वन विभाग और प्रशासन को सर्वे, अध्ययन और इसकी रोकथाम के ठोस प्रयास करने चाहिए। तेंदुए के आने से बच्चे दहशत में हैं।
- डा. जितेंद्र नागर, पर्यावरणविद एवं इसडा संयोजक
शहर में बार-बार आ रहे तेंदुए को लेकर जल्द ही भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों से सर्वे, रिसर्च और अध्ययन कराया जाएगा। तेंदुए के आने का स्रोत ट्रेस किया जाएगा। रूट मैप को लेकर तेंदुए के पंजों की पहचान की जाएगी। शहर के घने जंगलों में कॉम्बिंग की जाएगी।
- मनीष सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी
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