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    भारतीय मानक ब्यूरो की पहल, उप्र के नौ जिलों में घर-घर जाकर नकली उत्पादों पर नकेल कसेंगे बच्चे

    By Hasin ShahjamaEdited By: Sanjay Pokhriyal
    Updated: Wed, 19 Oct 2022 04:32 PM (IST)

    मुजफ्फरनगर के खतौली के कुन्दकुन्द जैन इंटर कालेज की छात्रा मरियम खान ने बताया कि हमें फैक्ट्री और लैब में ले जाकर असली नकली सामान को पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया है। हम छुट्टी वाले दिन घर-घर जाकर लोगों को नकली उत्पादों की जानकारी देंगे।

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    बच्चों को प्रशिक्षण देती भारत मानक ब्यूरो की टीम।

    हसीन शाह, साहिबाबाद : अब बाजार में ग्राहकों को गुमराह कर नकली सामान बेचना आसान नहीं होगा। भारतीय मानक ब्यूरो ने नौ जिलों में नकली सामान पर नकेल कसने के लिए 269 स्कूलों के बच्चों को प्रशिक्षण दिया है। इन जिलों में ये बच्चे घर-घर जाकर लोगों को असली व नकली उत्पाद की पहचान बता रहे हैं। इसकी शुरूआत मुजफ्फर नगर से की गई है। रविवार को छुट्टी के दिन बच्चों ने घर-घर जाकर लोगों नकली उत्पादों की पहचान बताई।

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    भारतीय मानक ब्यूरो के मानक अधिकारी रोहित राय ने बताया कि उनकी छह लोगों की टीम ने उत्तर प्रदेश के बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, हापुड़, रामपुर, मुरादाबाद और बिजनौर में जिला प्रशासन की अनुमति लेकर 38 स्कूलों के विज्ञान वर्ग के दो-दो शिक्षकों और 10वीं से 12वीं तक के विज्ञान वर्ग के 269 बच्चों का चयन किया गया। शिक्षकों ने स्कूल में बच्चों को प्रशिक्षित दिया था। इन बच्चों को नकली और असली उत्पाद की पहचान कराने के प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों को साहिबाबाद स्थित लैब में लाया गया। यहां उन्हें 400 से अधिक उत्पादों की असली और नकली जांच करने की टेस्टिंग दिखाई गई। उन्हें मिल्क पाउडर से लेकर पेपर की फैक्ट्रियों में ले जाकर असली व नकली उत्पादन कराने का ज्ञान दिया गया। बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए के लिए 150 बार कार्यशाला आयोजित की गई। विभाग की टीम एक माह में दो से तीन बार प्रशिक्षण देने के लिए स्कूल गई थी।

    घर-घर दस्तक दे रहे बच्चे

    अब बच्चे घर जाकर लोगों को असली नकली की पहचान के बारे में ज्ञान दे रहे हैं। एक बच्चे के लिए तीन से चार परिवारों को ज्ञान देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए वह छुट्टी वाले दिन घर-घर जाएंगे। इसकी शुरूआत मुजफ्फरनगर से की गई है। इसके बाद अन्य जिलों में इस मुहिम को शुरू किया जाएगा।

    महिलाएं किचन में कर सकती हैं पहचान

    लाल मिर्च पाउडर को पानी में डालने पर अगर रंग पानी में घुले और बुरादा जैसा तैरने लगे तो वह नकली है। घी में दो चम्‍मच हाइट्रोक्‍लोरिक एसिड और दो चम्‍मच चीनी में म‍िलाएं। अगर यह म‍िश्रण लाल रंग का हो जा ता है इसमें मिलावट है। दूध में पानी, मिल्‍क पाउडर या अन्य केमिकल की मिलावट की पहचान करने के लिए उसमें उंगली डालकर बाहर निकालें। अंगुली में दूध चिपकता है तो वह शुद्ध है। अगर दूध न च‍िपके तो दूध में मिलावट हो सकती है। सफेद कागज को हल्‍का भिगोकर उस पर चाय के दाने डाल दें। अगर कागज में रंग लग जाए तो वह चाय नकली है। असली चाय की पत्ती बिना गर्म पानी के रंग नहीं छोड़ती।

    एप से खुल जाता है नकली-असली का राज

    कुछ नकली सामान बेचने वाली कंपनियां मशहूर ब्रांड के नाम को कापी कर लेती हैं। वह स्पेलिंग के एक लेटर को हटा देती हैं। इससे वह कानूनी कार्रवाई से बच जाती हैं। आनलाइन शापिंग करने पर वेबसाइट की जानकारी करना जरूरी है। नकली उत्पाद में असली पार्ट्स की जगह नकली और घटिया पार्ट्स लगे रहते हैं। उत्पाद में घटिया प्लास्टिक, चमड़े की जगह रेक्सीन, सस्ता ग्लास, घटिया कपड़े का प्रयोग कर दिया जाता है। सामान की बनावट में अंतर होता है। इसे छूकर, देखकर महसूस कर सकते हैं। कंपनी उत्पाद पर सीरियल नंबर, कोड, माडल नंबर, ट्रेडमार्क और पेटेंट संबंधी विवरण लिखती है। कुछ लोग नकली सामान पर भी आइएसआइ मार्क लगा लेते हैं। उत्पाद पर सार्टिफिकेशन मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस (सीएमएल) नंबर लिखा होता है और हालमार्किग यूनिक आइडी के नंबर को बीआइएस (भारत मानक ब्यूरो) केयर एप पर डालने से उस उत्पाद की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। यह बहुत आसान है लेकिन 90 फीसदी लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।

    गाजियाबाद के 40 बच्चों का चयन

    गाजियाबाद के सीबीएसई, यूपी और आइसीएसई बोर्ड के चार स्कूलों के विज्ञान वर्ग के 40 बच्चों का चयन किया गया है। कुछ दिन बाद यहां के बच्चों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये बच्चे भी घर-घर जाकर लोगों काे नकली व असली सामान की जानकारी देंगे।

    मुजफ्फरनगर के खतौली के कुन्दकुन्द जैन इंटर कालेज की छात्रा मरियम खान ने बताया कि हमें फैक्ट्री और लैब में ले जाकर असली नकली सामान को पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया है। हम छुट्टी वाले दिन घर-घर जाकर लोगों को नकली उत्पादों की जानकारी देंगे।