गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद में पुराने रेलवे स्टेशन पर बुधवार को सरकारी अमले की उदासीनता ने मानवता को शर्मसार कर दिया। रेलवे स्टेशन पर 14 वर्षीय निर्वस्त्र किशोरी चार घंटे तक बेहोशी की हालत में पड़ी रही। जीआरपी और आरपीएफ के जवान किशोरी के पास से सिर झुकाकर निकलते रहे। एक ऑटो चालक ने रेलवे स्टेशन पर बच्चों के हक में काम करने वाले एक एनजीओ को मामले की सूचना दी। एनजीओ की महिला सदस्य ने किशोरी को कंबल से ढक दिया। मगर एनजीओ समेत पूरे सरकारी अमले ने किशोरी को अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई।

बता दें कि बुधवार सुबह 11 बजे रेलवे स्टेशन पर बैग स्कैनर मशीन से कुछ दूरी पर 14 वर्षीय किशोरी दर्द से कराह रही थी। इस दौरान वह बेहोश हो गई। बेहोश होने पर यात्री उसे देखने के बाद भी अनदेखा कर निकल रहे थे। दोपहर करीब ढाई बजे एक ऑटो चालक मसूद अली वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने इसकी सूचना स्टेशन पर बने एक एनजीओ बूथ पर दी। यह एनजीओ 18 साल से कम आयु के बच्चों के लिए काम करता है।

पहले तो एनजीओ के सदस्यों ने टालमटोल करनी शुरू कर दी। इस बीच एक और मनोज नामक यात्री इसी एनजीओ को किशोरी के निर्वस्त्र पड़े होने की सूचना देने पहुंचे। लगातार लोगों की शिकायत मिलने पर एनजीओ की महिला सदस्य मौके पर पहुंची और उसने किशोरी को कंबल से ढक दिया, मगर किसी ने उसे अस्पताल या नारी निकेतन पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। यात्रियों ने मामले की सूचना आरपीएफ और जीआरपी को दी। सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे, किशोरी के मगर मल-मूत्र में सने होने के कारण उन्होंने उसकी मदद नहीं की। जांच पड़ताल किए बिना ही ने सुरक्षाकर्मी उसे नशे की हालत में बताकर चले गए।

कपिल नागर (कार्यवाहक थाना प्रभारी, आरपीएफ) के मुताबिक, बेहोश महिला होने की सूचना मिली थी। मौके पर सुरक्षाकर्मी भेजे गए थे। देखने में लग रहा है किशोरी नशे की हालत में है। 

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