गाजियाबाद के मसूरी में आतंकी स्लीपर सेल की आहट, जैश-ए-मोहम्मद और फरहतुल्लाह घोरी नेटवर्क की जांच तेज
गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र में छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद आतंकी स्लीपर सेल की आशंका बढ़ गई है। ...और पढ़ें

मसूरी में बृहस्पतिवार को हुई छह आरोपितों की गिरफ्तारी। सांकेतिक तस्वीर सौजन्य- एआई जेनरेटेड

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विनीत कुमार, गाजियाबाद। मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव से छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद में आतंकी स्लीपर सेल की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और आतंकी फरहातुल्लाह घोरी से प्रभावित थे।
पुलिस के अनुसार आरोपित सोशल मीडिया पर इन संगठनों से जुड़े वीडियो और लिंक देखते थे और उन्हें अपने साथियों को भी दिखाते थे। जिस तरह नाहल गांव से एक साथ छह लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उससे यह आशंका मजबूत हुई है कि मसूरी क्षेत्र में कट्टरपंथी नेटवर्क सक्रिय हुआ है।
कहां का रहने वाला है फरहतुल्लाह घोरी?
फरहतुल्लाह घोरी मूल रूप से हैदराबाद का रहने वाला है और लंबे समय से पाकिस्तान में छिपकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करता रहा है। उसे अबू सूफियान, सरदार साहब और फारूक जैसे कई नामों से भी जाना जाता है।
वर्ष 1994 में वह सऊदी अरब चला गया था और बाद में 2015 में पाकिस्तान पहुंच गया। भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार घोरी पाकिस्तान के लाहौर से बैठकर भारत में स्लीपर सेल बनाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश करता रहा है।
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बड़े आतंकी हमलों की साजिशों में रहा शामिल
उसका नाम कई बड़े आतंकी हमलों की साजिशों में शामिल रहा है। इनमें वर्ष 2002 में गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर हमला, 2005 में हैदराबाद टास्क फोर्स कार्यालय पर आत्मघाती हमला और हाल के वर्षों में बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे विस्फोट की साजिश शामिल बताई जाती है। घोरी इंटरनेट और वीडियो संदेशों के जरिए भारतीय युवाओं को भड़काने की कोशिश करता है। वर्ष 2024 में भी उसने ट्रेन, पेट्रोलियम पाइपलाइन और हिंदू नेताओं को निशाना बनाने की धमकी दी थी।
मसूरी में बृहस्पतिवार को हुई छह आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की टीमें आरोपितों के डिजिटल कनेक्शन और संपर्कों की पड़ताल में जुटी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मसूरी क्षेत्र में कहीं बड़ा आतंकी नेटवर्क तो तैयार नहीं किया जा रहा था।
