गाजियाबाद को मिलेगा 16 किमी लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर, वैशाली से गोकुलपुरी तक सीधी कनेक्टिविटी; DPR पर चल रहा काम
गाजियाबाद में वैशाली से गोकुलपुरी तक 16 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसकी डीपीआर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ...और पढ़ें

दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के तहत गाजियाबाद में वैशाली से गोकुलपुरी तक नया मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, गाजियाबाद। वैशाली-गोकुलपुरी मेट्रो कॉरिडोर गाजियाबाद को दिल्ली और एयरपोर्ट से जोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम अब आगे बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के तहत गाजियाबाद में वैशाली से गोकुलपुरी तक नया मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित है, जो हिंडन एयरपोर्ट को सीधे जोड़ने वाला अहम प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
16 किमी लंबा होगा नया मेट्रो कॉरिडोर
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इस प्रस्तावित रूट के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने को कहा है। यह कॉरिडोर करीब 16 किलोमीटर लंबा होगा और वैशाली (ब्लू लाइन) से गोकुलपुरी (पिंक लाइन) तक जाएगा। इन तीनों परियोजनाओं को पूरा करने में करीब 45 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
हिंडन एयरपोर्ट तक आसान कनेक्टिविटी
इस मेट्रो लाइन की सबसे खास बात यह है कि यह हिंडन सिविल टर्मिनल (एयरपोर्ट) से होकर गुजरेगी। इससे गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली के लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिलेगी। यह इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली के पांच लाख से अधिक निवासियों का जीवन आसान कर सकता है। वर्तमान में हिंडन सिविल टर्मिनल दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन के नजदीकी स्टेशनों (दिलशाद गार्डन और मेजर मोहित शर्मा राजेंद्र नगर) से करीब 5 किलोमीटर दूर है। नया कॉरिडोर बनने से एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी।

कई अहम क्षेत्रों को जोड़ेगी लाइन
प्रस्तावित रूट में साहिबाबाद, मोहन नगर, पसोंडा जैसे प्रमुख इलाके शामिल हो सकते हैं। इससे इंदिरापुरम, वसुंधरा और ट्रांस हिंडन क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। उम्मीद है कि गोकुलपुरी से वैशाली के मध्य गोकुलपुरी, गगन विहार, पसौंडा हिंडन एयरपोर्ट, मोहननगर, साहिबाबाद और वैशाली मेट्रो स्टेशन बनाए जा सकते हैं। यह भी संभव है कि मोहननगर पर इंटरचेंज प्वाइंट बनाकर यात्रियों को रेड लाइन मेट्रो और अन्य रूट पर जाने के लिए रास्ता दिया जा सकेगा।
नमो भारत और अन्य नेटवर्क से भी जुड़ाव
यह कॉरिडोर भविष्य में नमो भारत (आरआरटीएस) और अन्य मेट्रो लाइनों से भी कनेक्ट होगा, जिससे यात्रियों को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिलेगी और यात्रा आसान होगी। यानी आगे जाकर यह मेट्रो भागदौड़ वाली जिंदगी में राहत लेकर आएगी। लंबी दूरियों का सुगम सफर बड़ी संख्या में लोगों को लाभान्वित करेगा।
फंडिंग समस्याएं और प्रगति
हालांकि, इस कॉरिडोर की राह इतनी भी आसान नहीं है। नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से साहिबाबाद तक की परियोजना 2018 से फंड की कमी के कारण लंबित है। इस परियोजना की डीपीआर 1,873 करोड़ रुपये की लागत के साथ पहले ही तैयार हो चुकी है। जीडीए ने पहले 16वें वित्त आयोग के तहत 2,441 करोड़ रुपये की मांग की थी। अब अधिकारियों का कहना है कि आवास मंत्रालय द्वारा एजेंसियों को डीपीआर तैयार करने के निर्देश मिलने के बाद परियोजना में आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इससे केंद्र और राज्य सरकार दोनों से फंड मिलने में मदद मिल सकती है।
अभी डीपीआर चरण में परियोजना
यह भी पढ़ें- दिल्ली से गाजियाबाद का सफर होगा आसान, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर बनाने की योजना; GT रोड पर जाम से मिलेगी मुक्ति
