गाजियाबाद मेट्रो का 47 करोड़ रुपये टैक्स माफ, आमजन पर बढ़ा बोझ: बड़े आंदोलन की तैयारी में व्यापारी और RWA
गाजियाबाद नगर निगम ने मेट्रो के 47 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स माफ कर दिया है और भविष्य में भी ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत संचालित मेट्रो का 47 करोड़ रुपये बकाया टैक्स न केवल पूर्व में माफ कर दिया गया था, बल्कि आगे से कोई टैक्स नहीं लगाया गया।
वहीं, ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं, जब डीएमआरसी का टैक्स माफ हो सकता है तो आमजन को टैक्स का बोझ क्यों डाला जा रहा है। व्यापारियों नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए टैक्स के खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। व्यापारी और आरडब्ल्यूए बेमियादी धरना देने की तैयारी कर रहे हैं।
वर्ष 2014 में नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर जो एमओयू साइन किया गया था। डीएमआरसी ने दावा किया था कि जो भी स्टेट टैक्स होगा वह यूपी सरकार की ओर से एमओयू साइन करने वाले जीडीए को वहन करना होगा।
2023 में जारी किया था नोटिस
नगर निगम ने इसके बाद डीएमआरसी के इसी कथन के आधार पर जीडीए को डीएमआरसी के सर्विस टैक्स अदा करने के लिए 2023 को नोटिस जारी किया था। जीडीए का कहना था कि डीएमआरसी के साथ एमओयू के साथ ऐसी शर्त लगाई गई थी कि जब तक प्रोजेक्ट निर्माणाधीन रहेगा, उस समय किसी भी तरह के स्टेट टैक्स को डीएमआरसी को नहीं देना है।
वहीं, प्रोजेक्ट के पूरा होते ही सर्विस टैक्स डीएमआरसी को देना होगा। बाद में डीएमआरसी, जीडीए और नगर निगम के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। जिसमें कहा गया था डीएमआरसी पर बकाया इस सर्विस टैक्स से जीडीए का कोई लेना-देना नहीं है।
डीएमआरसी ने भी निगम को आश्वस्त किया था कि वह दिलशाद गार्डन, शहीदनगर, राजगबाग, राजेंद्र नगर, श्यामपार्क, मोहननगर, अर्थला, हिंडन रिवर और नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन पर बकाया सर्विस टैक्स के लिए उच्चाधिकारियों से बात कर कदम उठाएगा।
डीएमआरसी पर टैक्स नहीं लगाया गया
तत्कालीन मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डा. संजीव सिन्हा ने कहा था कि डीएमआरसी ने निगम से कहा कि वह सर्विस टैक्स अदा नहीं करेंगे। इसके बाद शासन स्तर से डीएमआरसी का टैक्स माफ कर दिया गया था। आगे भी डीएमआरसी पर टैक्स नहीं लगाया गया था।
लोगों का कहना है कि मेट्रो ने कभी यात्रियों को किराये में रियायत नहीं दी। ऐसे में डीएमआरसी का टैक्स माफ कर दिया। आगे भी उस पर टैक्स नहीं लगाया। आमजन पर टैक्स क्यों थोपा जा रहा है? इस पर व्यापारी और आरडब्ल्यूए ने आरपार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। वह बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
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आगामी बोर्ड बैठक में बैठक कम कराकर। हाउस टैक्स नहीं बढ़ना चाहिए। जितने सालों में हाउस टैक्स नहीं बढ़ा उसी हिसाब से बढ़ा दो। 10 प्रतिशत बढ़ाना चाहिए। इससे ज्यादा नहीं बढ़ाना है। सर्वे करने में हाउस टैक्स चोरी को ठीक करो। प्रत्येक जोन से पांच पार्षदों की समिति बननी चाहिए जो टैकस संबंधित समस्याओं को सुनेगी। - नीरज गोयल, पार्षद
एक तरफ आम जनता पर चार से आठ गुना तक टैक्स बढ़ा दिया गया है। दूसरी तरफ मुनाफे में चल रही मेट्रो का करोड़ों का टैक्स माफ कर दिया गया। गाजियाबाद नगर निगम की जमीन का इस्तेमाल कर करोड़ों कमाने वाली मेट्रो पर 47 करोड़ का गृह-कर बकाया था। शासन द्वारा मेट्रो का पिछला और भविष्य का सारा टैक्स माफ कर दिया गया। जब तक बढ़ी हुई दरें वापस नहीं ली जातीं, हम टैक्स जमा नहीं करेंगे। - अवधेश शर्मा, अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल
