प्रदेश का पहला ग्रीन डेटा सेंटर साइबर अटैक से रहेगा सुरक्षित, Make in India क्लाउड और पीपीपी मॉडल पर बनाया जा रहा
साहिबाबाद में सीईएल उत्तर प्रदेश का पहला ग्रीन डाटा सेंटर बना रहा है। यह मेक-इन-इंडिया क्लाउड और पीपीपी मॉडल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य भारतीय डेटा को देश में ही सुरक्षित रखना और साइबर हमलों से बचाना है। डेटा सुरक्षा के लिए इसमें डिजास्टर रिकवरी सेंटर भी होगा। यह ऊर्जा-कुशल और भविष्य की जरूरतों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे सीईएल को प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये का लाभ होने की उम्मीद है। लोग अपने डेटा को बैंक लॉकर की तरह सुरक्षित रख सकेंगे।

ग्रीन डेटा सेंटर का मॉडल।
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद: साइट चार औद्योगिक क्षेत्र के सीईएल में बनने वाला ग्रीन डेटा सेंटर प्रदेश का ऐसा पहला डाटा सेंटर है जो मेक-इन-इंडिया क्लाउड और पीपीपी माॅडल पर तैयार हो रहा है।
इसमें देश के लोगों का डेटा देश में ही सुरक्षित रहेगा और किसी भी प्रकार के साइबर अटैक का असर इस पर नहीं होगा। वहीं किसी भी तरह के संकट से बचने के लिए सीईएल ने पूरी तैयारियां की है।
इसके लिए डेटा सेंटर के साथ दूसरे शहर में डिजास्टर रिकवरी सेंटर भी बनाया जा रहा है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति या उद्योगपति अपने डेटा को जब मर्जी अपलोड व डाउनलोड कर सकेंगे।
30 हजार स्क्वायर फीट में बनकर तैयार होगा डेटा सेंटरॅखा गया है, इसे 18 माह में पूरा करने का प्रयास रहेगा।
30 हजार स्क्वायर फीट में यह बनकर तैयार होगा पांच मंजिला डाटा सेंटर बनाया जाएगा। प्रत्येक मंजिल पर डेटा स्टोर करने के लिए 200 हाइ-डेंसिटी रैक बनाई जाएंगी।
यह सेंटर स्मार्ट कूलिंग, रिफ्लेक्टिव रूफिंग, वर्षा जल संचयन और मल्टी-आईएसपी सपोर्ट जैसी सुविधाओं से युक्त होगा और इसकी कुल क्षमता 30 मेगावाट है। हर फ्लोर पर 200 हाई-डेंसिटी रैक और 40 जीबीपीएस कनेक्टिविटी के लिए तैयार किया जा रहा है।
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से किया गया है डिजाइन
उन्होंने बताया कि सेंट्रल इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (सीईएल) एक मिनी रत्न सीपीएसई है, जो भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत कार्य कर रहा है।
यह ग्रीन डेटा सेंटर को ऊर्जा की खपत कम करने वाला, पूरी तरह सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से डिजाइन किया गया है।
ईएसडीएस के साथ साझेदारी के माध्यम से सीईएल आधुनिक क्लाउड और डेटा सेंटर को टेक्नोलाॅजी के साथ जोड़ रहा है। ईएसडीएस की पेटेंट तकनीक और सेवाएं इस केंद्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएंगी।
डेटा की क्षमता के अनुसार आवंटित होगी रैक
सीईएल के विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों के डाटा की क्षमता के अनुसार उन्हें डेटा सेंटर में रैक उपलब्ध कराई जाएगी।
किसी व्यक्ति के डेटा का आकार कम है तो एक रैक में दो या इससे अधिक लोगों का डेटा सुरक्षित किया जा सकता है। यदि किसी कंपनी या औद्योगिक इकाई का अधिक डाटा है तो उन्हें अलग से रैक उपलब्ध कराई जा सकती है।
इसमें वह अपने डेटा को कभी भी डाउनलोड व अपलोड कर सकेंगे।
सीईएल को प्रतिवर्ष होगा 10 करोड़ रुपये का फायदा
इस डेटा सेंटर के निर्माण में करीब एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। इस डेटा सेंटर सीईएल को प्रतिवर्ष करीब 10 करोड़ रुपये का फायदा होगा और 100 करोड़ रुपये का कारोबार किया जा सकेगा।
इसके साथ ही कोई भी संस्था या व्यक्ति जो डिजिटल रूप में अपना डाटा सुरक्षित रखना चाहता है वह इस डेटा सेंटर में बैंक की तरह अकाउंट खुलवा सकता है। बैंक लाकर की तर्ज पर यहां डेटा सुरक्षित किया जाएगा।
यहां डाटा सुरक्षित रखने वाले हर व्यक्ति या संस्था की यूजर आईडी बनाई जाएगी और पासवर्ड दिया जाएगा। क्लाउड भारतीय होने के कारण यहां स्टोर डेटा व बैकअप कभी भी नष्ट या हैक नहीं हो सकेगा।
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