यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 10, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बांग्लादेश में हिंदुओं का ऊंची आवाज में बोलना मुश्किल… रिक्शेवाले भी दिखाते हैं आंख, उद्यमी ने कहा- भारत सरकार निकाले हल
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं का जीवन बहुत मुश्किल हो गया है। वे ऊंची आवाज में बात तक नहीं कर सकते ...और पढ़ें

HighLights
- ढाका में रेडीमेड कपड़ों की फैक्ट्री चलाने वाले उद्यमी ने बताई स्थिति
- बोले रिक्शेवाले तक अल्पसंख्यकों को दिखा रहे आंख, पलायन के हालात
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं का रहना मुश्किल हो गया है। वे ऊंची आवाज में बात तक नहीं कर सकते। रिक्शे वाले भी आंख दिखाते हैं और गाड़ी ओवरटेक करने पर भी पिटाई कर दी जाती है। गांवों से अल्पसंख्यकों को पलायन करने के लिए विवश किया जा रहा है।
दैनिक जागरण को बांग्लादेश के ये हालात ढाका में रेडीमेड कपड़ों की फैक्ट्री चलाने वाले उद्यमी संजीव जैन ने बताई, जो यहां के मूल निवासी हैं।
तीन दशक पहले बांग्लादेश चले गए थे संजीव जैन
फिरोजाबाद के सुहाग नगर निवासी संजीव जैन तीन दशक पहले बांग्लादेश चले गए थे। वहां उन्होंने रेडीमेड कपड़ों का कारोबार शुरू किया और उसे दूसरे देशों तक फैलाया। वह अपने परिवार के साथ ढाका में रहते थे।
उन्होंने बताया कि उनका घर, कारखाना और कार्यालय वहीं था, लेकिन जुलाई 2016 में ढाका के एक रेस्टोरेंट में हुए आतंकी हमले में उनकी बेटी तारुषि जैन की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह 2017-2018 में गुरुग्राम आ गए। यहां वह रेस्टोरेंट चला रहे हैं। बांग्लादेश में गारमेंट का कारोबार भी चल रहा है। वह ढाका में लीज पर कारखाना लेकर रिलायंस कंपनी के लिए कपड़े बनवाते हैं।
शेख हसीना को भारत में शरण मिलने से वहां के बहुसंख्यक नाराज
संजीव जैन ने बताया कि वह 10 दिन पहले ही बांग्लादेश गए थे। वहां स्थितियां बहुत बिगड़ गई हैं। वहां से लौटने के बाद भी फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू, मुस्लिम श्रमिकों के संपर्क में हैं।
उनका कहना है कि तख्तापलट के बाद शेख हसीना को भारत में शरण मिलने से वहां के बहुसंख्यक नाराज हैं, इसलिए हिंदुओं को प्रताड़ित कर रहे हैं और भारत सरकार सहयोग नहीं कर रही है। सरकार को उनके हालातों के बारे में सोचना चाहिए।
दाढ़ी बढ़ाकर गए ढाका
संजीव जैन ने बताया कि पिछले दिनों जब वह ढाका गए तो मन में थोड़ी घबराहट थी। इसलिए दाढ़ी बढ़ा ली थी। ढाका पहुंचकर सीधे अपनी फैक्ट्री और कार्यालय गए। वहां व्यावसायिक कार्य निपटाए। इसके बाद लौट आए। उनका कहना है कि भारत सरकार को जल्द ही मामले का हल निकालना चाहिए।
