सपा के गढ़ की जनता का झुकाव किस ओर? अक्षय-बशीर व विश्वदीप के बीच सीधा मुकाबला; पढ़ें फिरोजाबाद से Ground Report
सबसे पहले बात वर्ष 2009 के लोस चुनाव की। इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव की अपील पर यहां के मतदाताओं ने अखिलेश को चुनाव जिता दिया लेकिन उनके सीट छोड़ने के बाद नाराज हुए और उप चुनाव में उनकी पत्नी डिंपल यादव को हराकर कांग्रेस के राज बब्बर के सिर जीत का सेहरा बांध दिया। भाजपा और सपा यहां चार-चार बार चुनाव जीत चुके हैं।
आनंद मिश्र, फिरोजाबाद। सुहाग नगरी फिरोजाबाद। चूड़ियों का यह शहर रिश्तों को खूब जोड़ता और परखता है। बनते-बिगड़ते रिश्तों की खनक यहां पिछले चुनावों में भी खूब सुनाई दी है। कभी जीत का सेहरा बंधता है तो और कभी पराजय का ‘हार’ भी प्रत्याशियों को पहनना पड़ता है। इस बार भी यहां चुनाव बड़ा रोचक है। पहले चाचा-भतीजा (शिवपाल और अक्षय) अलग थे और इस बार साथ। सपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट के चुनावी संग्राम पर प्रमुख संवाददाता आनंद मिश्र की रिपोर्ट...
सबसे पहले बात वर्ष 2009 के लोस चुनाव की। इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव की अपील पर यहां के मतदाताओं ने अखिलेश को चुनाव जिता दिया, लेकिन उनके सीट छोड़ने के बाद नाराज हुए और उप चुनाव में उनकी पत्नी डिंपल यादव को हराकर, कांग्रेस के राज बब्बर के सिर जीत का सेहरा बांध दिया। भाजपा और सपा यहां चार-चार बार चुनाव जीत चुके हैं।
इस बार भाजपा ने बसपा छोड़कर आए ठाकुर विश्वदीप सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है तो सपा ने सैफई परिवार से संबंध रखने वाले व 2014 का चुनाव जीत चुके प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव पर दांव खेला है। बसपा से चौधरी बशीर चुनाव मैदान में हैं। फिरोजाबाद सीट सीट उन चुनिंदा सीटों में है, जिन्हें सपा का गढ़ भी माना जाता है। इस बार सपा ने अपनी खोई सीट हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। चाचा शिवपाल भी अब साथ हैं।
2019 के चुनाव में सपा परिवार में रार के कारण ही अक्षय यादव को हार का सामना करना पड़ा था। सपा की जातीय गोलबंदी का फार्मूला इस सीट पर प्रभावी रहा है। यादव और मुस्लिम यहां निर्णायक स्थिति में हैं, लेकिन भाजपा भी इससे बेखबर नहीं है। भाजपा की कोशिश अपने परंपरागत वोट बैंक को साधते हुए सपा के पीडीए फार्मूले में सेंध लगाने की है।
हालांकि, बसपा छोड़कर भाजपा में आए ठाकुर विश्वदीप सिंह को अपनी ही पार्टी के लोगों की नाराजगी से भी जूझना पड़ रहा है। फिरोजाबाद की राजनीति को करीब से समझने वाले शिकोहाबाद के आलोक यादव कहते हैं कि ‘यहां चुनाव में कोई मुद्दा प्रभावी नहीं है। बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों की चर्चा सिर्फ मंच से ही होती है। जातीय समीकरण ही चुनाव को प्रभावित करते हैं।’
2022 के विधानसभा चुनाव के परिणाम का जिक्र करते हुए बताते हैं कि ‘सपा ने तीन और भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। लोकसभा चुनाव में भी शिकोहाबाद, सिरसागंज और जसराना में सपा को बढ़त मिल सकती है वहीं, भाजपा टूंडला और फिरोजाबाद में आगे रहेगी।’ आलोक यादव के पिता चौधरी महाराज सिंह शिकोहाबाद से पहले विधायक थे। वह 1967 में मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रहे। आलोक यादव की बात कुछ हद तक सही भी दिखती है।
टूंडला के नारखी ब्लाक में धौकल के प्रधान राजेश कुमार भाजपा के पक्ष में माहौल को बताते हैं। नारखी बड़े पैमाने पर शिमला मिर्च की खेती के लिए जाना जाता है। समस्या यहां खारे पानी की भी है। करीब 150 गांव इससे सीधे तौर पर प्रभावित हैं, बावजूद इसके चुनाव में यह मुद्दा नहीं बन पा रहा है। नारखी के बीज कारोबारी दिनेश पाल सिंह बताते हैं कि ‘शिमला मिर्च की खेती की वजह से यहां किसान और मजदूर दोनों खुश हैं। मजदूरों को साल में 10 माह तक काम मिलता है। मिर्च की खेती को यदि सरकार का कुछ और सहयोग मिल जाए तो स्थिति और बेहतर हो सकती है।’
पास ही खड़े गढ़ीहंसराम गांव के किसान रामभरोसे सीधे चुनाव की बात करते हैं। कहते हैं ‘मोदी के नाम पर भाजपा को वोट देंगे। जातिवाद की राजनीति इन्हें पसंद नहीं है।’ कहते हैं कि यदि हमारे खेत में मुसलमान मजदूर न हों तो मिर्च की खेती नहीं हो पाएगी। रामभरोसे कुछ भी कहें, लेकिन जातिवाद की जड़ें यहां गहरी हैं। शिकोहाबाद के डंडियामई गांव में मिले श्याम वशिष्ठ सिर्फ इसलिए भाजपा से नाराज हैं कि पार्टी ने ठाकुर को टिकट दे दिया। कहते हैं कि ‘मौजूदा सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष सभी ठाकुर हैं, अब मैनपुरी के बाद यहां भी ठाकुर को टिकट दे दिया है।’
पास खड़े सिकंदर बघेल की नाराजगी की वजह भी यही है। मैनपुरी से योगी सरकार के मंत्री जयवीर सिंह को टिकट देने के बाद यह माना जा रहा था कि भाजपा फिरोजाबाद से किसी अन्य जाति पर दांव लगाएगी, लेकिन क्षत्रियों की नाराजगी के शोर की वजह से पार्टी ऐसा नहीं कर पाई। भाजपा के इस निर्णय से ब्राह्मण यहां नाराज बताए जाते हैं, जिन्हें मनाने की जिम्मेदारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय समेत अन्य ब्राह्मण नेताओं को सौंपी गई है।
डंडियामई गांव के दूसरे कोने में ताश की बाजी समाप्त होने के बाद चुनाव पर शुरू हुई बहस फिरोजाबाद के वोटरों के मिजाज को काफी हद तक साफ कर देती है। किसान प्रमोद कुमार चर्चा से पहले ही फूल का नाम लेते हैं। सुरेश चंद्र भी कहते हैं कि भाजपा के वर्तमान सांसद (डा. चंद्रसेन जादौन) ने काम भले न किया हो, लेकिन आदमी अच्छा है। ये दोनों मोदी नहीं, योगी का नाम लेते हैं, कहते हैं कि ‘गुंडाराज खत्म कर दिया।’
वहीं, गायों को चारा देकर आए राजकुमार बेसहारा पशुओं की समस्या से परेशान हैं। कहते हैं कि ‘दिन की रखवाली करो तो रात को खा जाते हैं, रात में करो तो दिन में फसल नष्ट कर देते हैं।’ इन्हें सरकार की मुफ्त की योजनाओं से भी दिक्कत है। कहते हैं कि ‘मुफ्त में कुछ नहीं होना चाहिए।’
करीब बैठे धर्मेंद्र शर्मा तनिक तैश में बोलते हैं कि ‘मुफ्त राशन खत्म कर दो, देखें कितने वोट भाजपा को मिलते हैं।’ धर्मेंद्र साइकिल के साथ हैं। ठाकुर सन्ने सिंह भी उन्हीं के स्वर में स्वर मिलाते हैं। कहते हैं कि ‘विपक्ष मुक्त भारत की बात करना तानाशाही है।’ गांव के लोगों को हिंद लैंप फैक्ट्री बंद होने की भी टीस है। यहां बहस पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के पोते और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुंच जाती है, लेकिन हम इस बहस का हिस्सा नहीं बनते हैं।
हकीकत समझिए...
फिरोजाबाद में चूड़ी कारोबारी रितेश अग्रवाल कहते हैं ‘व्यापारियों में तो माहौल मोदी जी के पक्ष में ही है।’ वह चूड़ी उद्योग की समस्याओं पर कहते हैं कि जिले में इस उद्योग से दो से ढाई लाख लोग जुड़े हैं। सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों को चूड़ी उद्योग की जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। हमें गैस के नए कनेक्शन नहीं मिल रहे हैं, पुराने गैस कनेक्शन का कोटा नहीं बढ़ रहा है।
उद्योग बंधु की बैठक में हम इन मुद्दों को उठाते रहे हैं। वहीं, मदीना कालोनी के अयाज अहमद चुनावी माहौल को सपा के पक्ष में 60 प्रतिशत और भाजपा के पक्ष में 40 प्रतिशत बताते हैं। कहते हैं कि पिछले चुनाव से मिले सबक के बाद सपा ने जमीनी स्तर पर काफी मेहनत की है जबकि भाजपा के लोग हमारे पास वोट मांगने तक नहीं आते हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।