यूपी में गहराया पराली का संकट, पयार की लपटों से आसमान हुआ काला; गठित 816 टीमों पर उठ रहें सवाल
उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं ने पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आसमान में धुंध छाने से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। प्रशासन ने 816 टीमों का गठन किया है लेकिन फिर भी पराली जलाने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है लेकिन वे आगे नहीं आ रहे हैं।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। पयार (पराली) पर्यावरण के लिए नुकसान देय है, इस संदेश को प्रचारित करने के साथ ही पयार जलाने की घटनाएं रोकने को प्रशासन ने 816 टीमें लगाईं हैं, फिर भी खेल में पयार जलाने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
बढ़ रहा पर्यावरण प्रदूषण और बीमारियां
15 हजार तक जुर्माने का भय नहीं
पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी, 1272 मामले आए सामने
प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए गए तमाम उपायों के बावजूद फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में इस वर्ष वृद्धि देखी गई है। प्रोत्साहन और सख्ती दोनों मोर्चों पर अमल के बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले हैं।
खेतों से उठने वाले धुएं की निगरानी के हालिया आंकड़े (एक नवंबर तक) उत्तर प्रदेश में ऐसे 1272 मामलों की पुष्टि कर रहे हैं, जबकि बीते वर्ष इस अवधि तक 1066 घटनाएं सामने आईं थीं। संयुक्त निदेशक कृषि जेपी चौधरी ने स्वीकारा कि इस वर्ष अब तक पिछले वर्ष से 206 घटनाएं अधिक हुईं हैं।
चौधरी की मानें तो इस वर्ष सितंबर माह में बारिश हुई थी, आलू व सरसों की खेती करने वाले किसानों ने खेतों की नमी का उपयोग करने और अपने खेतों की सफाई जल्द करने के लिए फसल अवशेषों को जलाया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में पराली से कहीं अधिक घटनाएं कूड़ा जलने व अन्य मामलों से संबंधित रहीं हैं।
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