फतेहपुर में चलती ट्रेन में मारी गोली, फिर शव को बाहर फेंका, अधिवक्ता व उसके दो सगे भाइयों समेत 4 को उम्रकैद
फतेहपुर में चलती ट्रेन में पूर्व प्रधान की गोली मारकर हत्या करने और शव फेंकने के मामले में चार लोगों ...और पढ़ें

पुलिस अभिरक्षा में दोषी हाईकोर्ट अधिवक्ता लालमन, रामचंद्र, माघी व कृष्णपाल। जागरण
HighLights
पंचायत चुनाव की चली आ रही पुरानी रंजिश में हत्या कर शव को ट्रेन से बाहर फेंका
र्ष 1999 में अधिवक्ता के भाई लालचंद की हत्या से शुरू हुआ था खूनी खेल, सुरेश था आरोपित
कानपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन में खागा से सवार हुए थे, रमवां स्टेशन के आगे हुई थी वारदात
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। पंचायत चुनाव की चली आ रही खूनी रंजिश में चलती पैसेंजर ट्रेन में पूर्व प्रधान की गोली मारकर हत्या करने वाले अधिवक्ता व उसके दो सगे भाइयों समेत चार को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी। मामले की अंतिम सुनवाई फास्ट ट्रैक नंबर-2 में हुई।
साक्ष्य व गवाहों के आधार पर पीठासीन अधिकारी अजय सिंह प्रथम की अदालत ने खागा कोतवाली के कटोघन गांव निवासी अधिवक्ता लालमन व उसके सगे भाई माघी सिंह व रामचंद्र सिंह समेत कृष्णपाल सिंह को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.05 लाख-1.05 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। हत्या के पीछे पुरानी चुनावी खूनी रंजिश बताई जा रही है। इसके पहले वर्ष 1999 में दोषी अधिवक्ता सगे भाई लालचंद्र की हत्या मृतक सुरेश सिंह ने कर दी थी।
ट्रेन में हुई सनसनीखेज घटना 21 सितंबर 2002 में हुई थी। खागा कोतवाली के कटोघन गांव निवासी ओंकार सिंह यादव के अनुसार वह व भाई पूर्व प्रधान सुरेश सिंह और भतीजे श्यामेंद्र के साथ फतेहपुर कचहरी आ रहे थे।
सुबह प्रयागराज से कानपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन में खागा से सवार हुए थे, जैसे ही ट्रेन रमवां स्टेशन के आगे पहुंची, उसी ट्रेन में गांव के अधिवक्ता लालमन व उसके सगे भाई माघी सिंह व चंद्रपाल सिंह और खागा कोतवाली के बैजूपुर गांव निवासी कृष्णपाल सिंह योजना के तहत सवार हुए और रमवां स्टेशन के समीप सबने मिलकर तमंचे से गोली मारकर सुरेश सिंह को मौत के घाट उतार दिया और शव को ट्रेन से बाहर फेंक दिया।
हत्यारे मृतक की दोनाली बंदूक और कारतूस भी लूटकर ले गए। हत्या के बाद हत्यारों ने मृतक के शव को लात मारकर ट्रेन के बाहर फेंक दिया था। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर चारों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास व प्रत्येक को एक लाख पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुना दी। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अजय कुमार सिंह और रणधीर सिंह ने तर्क रखे। अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
अदालत ने कहा सबके लिए कानून बराबर
दोषी साबित हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता लालमन ने स्वयं को अधिवक्ता होना बताया गया और अपने को दोषमुक्त करने की याचना की गई। लेकिन अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सबके लिए कानून बराबर है।
ये धाराएं लगी थीं
- धारा 302 - चारों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास व प्रत्येक को एक लाख पांच हजार रुपये का अर्थदंड
- धारा 404 - चारों दोषियों को दो वर्ष का कारावास व प्रत्येक को पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड
