ब्रिटिश कालीन व्यवस्था को बदलने की जरूरत
जागरण संवाददाता फर्रुखाबाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने पर जब लाल किला पर तिरंगा फहर

जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने पर जब लाल किला पर तिरंगा फहरा तो उनका सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। हो भी क्यों न आखिरकार अंग्रेजों से लंबी लड़ाई के बाद आजादी के दीवानों ने देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद जो कराया था। देश को आजाद हुए 75 वर्ष भले ही हो गए, लेकिन आज भी देश में ब्रिटिशकाल से चली आ रही कानून व्यवस्था ही लागू है। इसमें परिवर्तन की बेहद आवश्यकता है। शरीर से शिथिल पड़ चुके नगला दीना फतेहगढ़ के रहने वाले 89 वर्षीय डा. ब्रह्मदत्त अवस्थी देश की आजादी पर बात छिड़ते ही जोश व जज्बे से भर गए।
बोले कि जब देश को आजादी दिलाने में क्रांतिकारी बिगुल फुंके थे, तब उनकी उम्र 14 वर्ष से अधिक थी। आजादी का जज्बा उनके दिल में भी था। जब महात्मा गांधी स्वराज कुटीर आए थे तो वह भी उनका भाषण सुनने गए थे। महात्मा गांधी बहुत धीमे बोला करते थे। देश आजाद होने के बाद जब लाल किला पर तिरंगा फहरा तो उन्होंने भी आतिशबाजी छुड़ाकर खुशी मनाई थी। पूरा देश उल्लास और उमंग में डूबा था। राजेपुर ब्लाक के नगला हूसा में वर्ष 1932 में जन्मे डा. ब्रह्मदत्त अवस्थी कहते हैं कि आजादी के बाद भारत देश में जो कानून बनने चाहिए थे, वह आज तक नहीं बने। आज भी अंग्रेजों के बनाए हुए कानून ही चल रहे हैं, उन्हें बदलने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में देश में बहुत सुधार की जरूरत है। सत्ता की कुर्सी हासिल करने के लिए नेताओं में होड़ है। संसद में लात-घूसे व कुर्सियां चलती हैं। अगर देश बदलना है तो युवाओं को अपनी सोच बदलनी होगी। पहले युवाओं के अंदर बुरी आदतें नहीं थीं और आज का युवा बुराई की ओर बढ़ता जा रहा है। नई पीढ़ी में संस्कारों की कमी भी आ रही है। पहले लोग राजनीति में समाजसेवा के लिए आते थे, लेकिन अब अपने स्वार्थ के लिए आ रहे हैं। हालांकि 75 साल पहले और अब के भारत में बहुत बदलाव आया है। अब आधुनिक भारत में लोग रह रहे हैं।
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