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Kampil Tourism: 4.70 करोड़ से बदलेगी ऐतिहासिक कंपिल की तस्वीर, द्रौपदी जन्मस्थली से रामेश्वर नाथ मंदिर तक होगा विकास

Published: Fri, 09 Oct 2026 11:38 PM (IST)

प्राचीन नगरी कंपिल को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए 4.70 करोड़ रुपये की एकीकृत पर्यटन विकास ...और पढ़ें

रामेश्वर नाथ मंदिर के बाहर होती निर्माण की तैयारी। जागरण

रामेश्वर नाथ मंदिर के बाहर होती निर्माण की तैयारी। जागरण

HighLights

  1. कंपिल के पर्यटन विकास हेतु 4.70 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत।

  2. द्रौपदी जन्मस्थली और रामेश्वर नाथ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण।

  3. पर्यटक सुविधा केंद्र और इंटरैक्टिव इंस्टालेशन भी स्थापित होंगे।

संवाद सूत्र, कंपिल(फर्रुखाबाद)। रामायण की स्मृतियां, महाभारत की गाथाएं, कपिल मुनि की तपस्थली और जैन धर्म की पवित्र तीर्थभूमि सहित धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों को समेटे प्राचीन नगरी कंपिल अब पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। समेकित पर्यटन विकास के लिए 4.70 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके तहत द्रौपदी जन्मस्थली के विकास, प्राचीन श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण और पर्यटकों की सुविधाओं के विस्तार की योजना है।


परियोजना के तहत प्राचीन श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में करीब 30 लाख रुपये की लागत से भव्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। इसके अलावा करीब 2.37 करोड़ रुपये की लागत से चार इंटरैक्टिव इंस्टालेशन स्थापित करने की योजना है। इनके माध्यम से द्रौपदी के जन्म, उनके स्वयंवर, श्रीकृष्ण के साथ उनकी मित्रता और कपिल मुनि के आश्रम में शिक्षा से जुड़े प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा।

पर्यटकों को ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देने के लिए स्टोन स्टोरी बोर्ड और इंटरप्रिटेशन पैनल भी लगाए जाने की योजना है। करीब 55 लाख की लागत से पर्यटक सुविधा केंद्र विकसित किया जाएगा। परियोजना की पहली किस्त में 1.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लखनऊ की कार्यदायी संस्था जीएस कंस्ट्रक्शन को सौंपी गई है। निर्माण स्थल पर खोदाई और शुरुआती निर्माण शुरू हो गईं।

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय कारोबार को भी उम्मीद


मंदिर का सौंदर्यीकरण और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का विकास पूरा होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है। सावन में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां बढ़ती हैं। पर्यटन सुविधाओं के विकास और प्रचार-प्रसार से यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे फूल-माला एवं प्रसाद विक्रेताओं, स्थानीय दुकानदारों, खान-पान से जुड़े कारोबारियों और परिवहन सेवाओं को लाभ मिलने की संभावना है।

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