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    यहां लीजिए 20 किस्म के गुलाबों की महक

    विश्व गुलाब दिवस - कायमगंज की नर्सरियों में विकसित की जाती गुलाब की पौध - सितंबर में रोपी ज

    By JagranEdited By: Updated: Tue, 21 Sep 2021 10:54 PM (IST)
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    यहां लीजिए 20 किस्म के गुलाबों की महक

    विश्व गुलाब दिवस:

    - कायमगंज की नर्सरियों में विकसित की जाती गुलाब की पौध

    - सितंबर में रोपी जाती गुलाब की पौध, मार्च में खिलते फूल जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद :

    पूजा की थाली हो या फिर शादी की वरमाला, सम्मान व प्यार का इजहार करना हो या फिर सौंदर्य निखार, चिकित्सा प्रणाली हो, मिल सब जगह जाएगा। ऐसे महत्व वाले गुलाब की पौध यहां तैयार की जाती है। फर्रुखाबाद के कायमगंज की नर्सरियों में 20 तरीके के गुलाब बिकते हैं, लेकिन यहां पर गुलाब की देशी प्रजाति को अधिक विकसित किया जाता है।

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    कायमगंज में कृषि उद्योग की तरह संचालित हो रहीं नर्सरियों में फलद ार, फूलदार, शोभादार व छायादार किस्मों के पौधे होते हैं। क्षेत्र के गांव पपड़ी, बरझाला, मीरपुर, अताईपुर, गोदामनगला से मेंदपुर तक फैले गांवों के हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। इन नर्सरियों में गुलाब की पौध विकसित की जाती है। कई प्रजातियों को पुणे, कोलकाता, कश्मीर और बनारसी गुलाब को बाहर की मंडियों से मंगाकर यहां पौधे तैयार किए जाते हैं। यहां विकसित कश्मीरी गुलाब देखने में देशी जैसा होता है, लेकिन विशेषता यह कि इसका फूल झड़ता नही। पुणे से लाकर विकसित पेराफिट की पंखुड़ियां दो रंग की होती हैं। जार्जिया गुलाब पीले रंग का होता है। मिनीचर गुलाब गुच्छे में उगते है, कांटेरहित यह गुलाब लाल व सफेद रंग में होते हैं। फ्लाई अंबर गुलाब बेल की तरह बढ़ता है। इसके अलावा नारंगी रंग में फ्लोरीवांडा, हाईब्रिड टी रोज, बनारसी गुलाब सहित विभिन्न किस्मों के गुलाब यहां विकसित होते हैं। गांव बरझाला निवासी नर्सरी कारोबारी सुरजीत गंगवार ने बताया कि सितंबर में गुलाब पौध की तैयारी होती है। नवंबर में कटिग लगती है, मार्च में गुलाब आने लगते हैं। एक बार लगाई गई पौध पांच-छह वर्ष तक फूल देती है।

    औषधीय गुणों से भरपूर है गुलाब

    गुलाब की देशी प्रजाति का फूल औषधीय गुणों से भरपूर है। इसी कारण अधिकांश सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, दवाओं में इसका उपयोग किया जाता है। गुलाब के ताजे फूलों से गुलाब जल और गुलाब का इत्र तैयार किया जाता है। इसके लिए आसवन विधि (डिस्टीलेशन) अपनाई जाती है। इस विधि से गुलाब जल व इसका तैलीय रूप में मूल तत्व (रूह) बन जाती है।

    घरों की शोभा बनता है गुलाब

    कांटेदार पौधा होने के बावजूद लोग इसे अपने घरों में खूब लगाते हैं। इसी कारण इसकी विभिन्न प्रजातियां विकसित की गई हैं। जिनमें रंग-बिरंगे फूल आते हैं। हालांकि इन फूलों को गुलाब जल और इत्र बनाने में उपयोग नहीं होता है।

    कैंसर मरीजों को प्रेरणा देने के लिए मनाया जाता विश्व गुलाब दिवस

    विश्व गुलाब दिवस हर साल 22 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को और उनके उनके जीवन को एक नई उम्मीद, नई आशा से भरने के लिए समर्पित है।