रिजिजू का संकिशा दौरा: भाजपा की बौद्ध मतदाताओं को साधने की चुनावी रणनीति
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का संकिशा दौरा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की बौद्ध अनुयायियों और अनुसूचित जाति के ...और पढ़ें

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू।
HighLights
रिजिजू का संकिशा दौरा, बौद्ध अनुयायियों को साधने का प्रयास
फर्रुखाबाद में 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों का असर
भाजपा की अनुसूचित जाति और बौद्ध समाज में पैठ मजबूत करने की रणनीति
विजय प्रताप सिंह, फर्रुखाबाद। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। इसी क्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू का प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल संकिशा का दौरा और वहां अभिधम्म महोत्सव में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीति में रुचि रखने वाले इसे केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक दौरा न मानकर, आगामी चुनावों से ठीक पहले अनुसूचित जाति और बौद्ध अनुयायी मतदाताओं के बीच पैठ मजबूत करने के लिए एक बड़े संदेश के रूप में देख रहे हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के मुकेश राजपूत ने बसपा और सपा गठबंधन के उम्मीदवार मनोज अग्रवाल को 2,21,702 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
27 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री ने संकिशा में अभिधम्म महोत्सव में हुए थे शामिल
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत की जीत का अंतर महज 2678 मतों का ही रह गया था। स्थिति यह थी कि अलीगंज व कायमगंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी पिछड़ गए थे। गनीमत रही कि भोजपुर, अमृतपुर व सदर विधानसभा क्षेत्रों से मिली जीत ने इस अंतर को पाटकर उनकी लाज बचा ली। 2024 के नजदीकी मुकाबले ने भाजपा के रणनीतिकारों को चौंका दिया।
चुनावों के विश्लेषण से साफ हुआ कि बौद्ध अनुयायी अनुसूचित जाति तथा शाक्य मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भाजपा से छिटककर विपक्षी गठबंधन की ओर चला गया था। ऐसे में किरेन रिजिजू जैसी बड़ी केंद्रीय शख्सियत को संकिशा भेजकर भाजपा ने इस डैमेज को कंट्रोल करने और अनुसूचित जाति व बौद्ध समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा से छिटक गया था बौद्ध अनुयायियों का समर्थन
महोत्सव के दौरान केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि किसी बुद्धिष्ट को पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप में काम करने का मौका मिला है। वह भाजपा सरकार व प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात कर संकिशा को बौद्ध सर्किट में जोड़ने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह कहकर स्थानीय लोगों और बौद्ध अनुयायियों की पुरानी मांग को छुआ है। मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का हित मजबूत भाजपा सरकार में सुरक्षित है।
अखिलेश को एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी करार दिया
सपा व कांग्रेस का गठबंधन और उनके दावे प्रदेश के विकास की दिशा को प्रभावित नहीं कर पाएंगे। मंत्री का यह बयान कार्यकर्ताओं में जोश भरने और विपक्षी खेमे के दावों को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अपने दौरे में रिजिजू ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर भी दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने अखिलेश को अपना मित्र तो स्वीकार किया, लेकिन साथ ही उन्हें एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी करार दिया।
इस बयान के जरिए उन्होंने यह साफ संदेश दिया कि चुनावी मैदान में दोस्ती और राजनीति अलग-अलग रास्ते पर चलती है। यह टिप्पणी सपा के उस कोर वोट बैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश है जो विकास और व्यक्तिगत छवि के आधार पर भाजपा की ओर आकर्षित हो सकता है।
रिजिजू का यह संकिशा दौरा साफ संकेत देता है कि भाजपा अपनी कमजोर हुई पकड़ को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। अब देखना यह होगा कि संकिशा से दिया गया यह 'अभिधम्म' संदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों में कितना मंगलकारी साबित हो सकता है।
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